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18 May 2022 · 1 min read

एकाकीपन

एकाकीपन

मैं और मेरा एकाकीपन
सूना सूना सा जीवन
बींध जाती अंतर्मन
नीरवता की वो चुभन

मौन का है हाहाकार
चुप्पी काँधे पर सवार
खामोशी का अंधकार
कौन बोले अबकी बार

श्वास में उच्छ्वास में
टिकी हर आस में
उर के विश्वास में
आओगे तुम पास में

मुखरित होगा सूनापन
छलक उठेंगे आद्र नयन
अधरों पर होगी कम्पन
मूक फिर भी है वचन

स्वरहीन प्रेम भरमाया
निस्पंद हो गई काया
मौन तू सुन न पाया
बोलना मुझे न आया

रेखांकन।रेखा

Language: Hindi
3 Likes · 5 Comments · 437 Views
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