Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Oct 2016 · 1 min read

इंतजार

मेरी आवारगी के हमसाये
वीरानों में मुझे छोड़ गये ।
कोई उसको बता दे
किसी को इंतजार है ।
आवारा बादल है न जाने कहाँ बरसेगा ।
कोई हवा उसे प्यासी जमीन पर ला बरसाये ।

Language: Hindi
Tag: शेर
335 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Ranjan Goswami
View all
You may also like:
- मेरी मोहब्बत तुम्हारा इंतिहान हो गई -
- मेरी मोहब्बत तुम्हारा इंतिहान हो गई -
bharat gehlot
हैं श्री राम करूणानिधान जन जन तक पहुंचे करुणाई।
हैं श्री राम करूणानिधान जन जन तक पहुंचे करुणाई।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
हे प्रभू !
हे प्रभू !
Shivkumar Bilagrami
शीत .....
शीत .....
sushil sarna
अहिल्या
अहिल्या
Dr.Priya Soni Khare
चुल्लू भर पानी में
चुल्लू भर पानी में
Satish Srijan
प्रकृति
प्रकृति
नवीन जोशी 'नवल'
एक बेटी हूं मैं
एक बेटी हूं मैं
Anil "Aadarsh"
खेल जगत का सूर्य
खेल जगत का सूर्य
आकाश महेशपुरी
कण-कण में श्रीराम हैं, रोम-रोम में राम ।
कण-कण में श्रीराम हैं, रोम-रोम में राम ।
डॉ.सीमा अग्रवाल
रस्सी जैसी जिंदगी हैं,
रस्सी जैसी जिंदगी हैं,
Jay Dewangan
वो अपना अंतिम मिलन..
वो अपना अंतिम मिलन..
Rashmi Sanjay
ये दुनिया है आपकी,
ये दुनिया है आपकी,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Kabhi kabhi
Kabhi kabhi
Vandana maurya
माँ का निश्छल प्यार
माँ का निश्छल प्यार
Soni Gupta
*बहस का अर्थ केवल यह, बहस करिए विचारों से  【मुक्तक】*
*बहस का अर्थ केवल यह, बहस करिए विचारों से 【मुक्तक】*
Ravi Prakash
बादल गरजते और बरसते हैं
बादल गरजते और बरसते हैं
Neeraj Agarwal
प्रेम ही जीवन है।
प्रेम ही जीवन है।
Acharya Rama Nand Mandal
ख़ुद को ख़ोकर
ख़ुद को ख़ोकर
Dr fauzia Naseem shad
💐प्रेम कौतुक-437💐
💐प्रेम कौतुक-437💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
पेड़ से कौन बाते करता है ?
पेड़ से कौन बाते करता है ?
Buddha Prakash
"अच्छी आदत रोज की"
Dushyant Kumar
सनम
सनम
Sanjay ' शून्य'
“निर्जीव हम बनल छी”
“निर्जीव हम बनल छी”
DrLakshman Jha Parimal
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀 *वार्णिक छंद।*
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀 *वार्णिक छंद।*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
'स्वागत प्रिये..!'
'स्वागत प्रिये..!'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
#ग़ज़ल
#ग़ज़ल
*Author प्रणय प्रभात*
तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला
तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला
Dr Archana Gupta
कितनी बार शर्मिंदा हुआ जाए,
कितनी बार शर्मिंदा हुआ जाए,
ओनिका सेतिया 'अनु '
शर्म शर्म आती है मुझे ,
शर्म शर्म आती है मुझे ,
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
Loading...