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10 Sep 2022 · 1 min read

आधा इंसान

वो पूर्ण नही हो सकता जब तक
करुणा, वेदना, प्रेम और अपनत्व
नही है जिनके अंदर ।

मैं कैसे कह दूं इंसान उनको
इंसानियत कही भी नजर न आये
जिनके अंदर ।।

आये दिन नित खबर है आती
लूट, मार, खून खराबा, छीना- छपटी ।
अपनापन कही भी नजर ना आये
हर एक इंसान बन बैठा है आज कुटिल और कपटी ।।

©गोविन्द उईके

Language: Hindi
Tag: कविता
4 Likes · 2 Comments · 79 Views
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