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2 Apr 2024 · 1 min read

आदमी बेकार होता जा रहा है

आदमी बेकार होता जा रहा है
बहुत लाचार होता जा रहा है

हाल मत पूछिए हृदय का
फकत बेजार होता जा रहा है

इश्क इबादत हुआ करता था
अब कारोबार होता जा रहा है

कभी घर था जो बसर के लिए
बड़ा बाजार होता जा रहा है

राज जो राज था कल तलक
आज अखबार होता जा रहा है

अंदाज हुनर सलीका रखे रहो
पैसा किरदार होता जा रहा है

जंगल मिट रहे जमीन से
आंगन अश्जार होता जा रहा है

कत्ल हो सकते हो कभी भी
हुस्न हथियार होता जा रहा है

– हरवंश हृदय
बांदा

1 Like · 2 Comments · 2135 Views
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