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7 Feb 2017 · 1 min read

II जरूरी है II

आंखों की भाषा से आगे,
बढ़ना जरूरी है l
शब्द ना दे साथ फिर भी,
कहना जरूरी है ll

आंखों का क्या खुशी में भी,
आंसू बहाती है l
आंखों के दरिया से आगे,
निकलना जरूरी है ll

हर घड़ी है इम्तहां,
सोना नहीं अब तो l
हो कठिन राहें मगर,
चलना जरूरी है ll

आस है फिर भी,
एक मुलाकात की l
नामुमकिन नहीं कुछ,
बताना जरूरी हैll

संजय सिंह “सलिल ”
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

Language: Hindi
346 Views
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