Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 May 2022 · 1 min read

अभिलाषा

जब भी मरूं,देश के लिए
मरूं,
ऐसा देना तुम मुझे वरदान।

मेरी मौत ऐसा देना ईश्वर,
हो जाऊँ देश के लिए कुर्बान।

आऊँ तिरंगे में लिपटकर,
धुन बज रहा हो,राष्ट्र गान।

अपनी मिट्टी का तिलक हो सर पर ,
आँचल हो धरती का परिधान।

सबके मुख से एक स्वर निकले
गर्व है तुम पर मेरे जवान।

~अनामिका

Language: Hindi
6 Likes · 4 Comments · 645 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
कोई आयत सुनाओ सब्र की क़ुरान से,
कोई आयत सुनाओ सब्र की क़ुरान से,
Vishal babu (vishu)
💐प्रेम कौतुक-318💐
💐प्रेम कौतुक-318💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
मैं तो महज आग हूँ
मैं तो महज आग हूँ
VINOD CHAUHAN
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
इरादा हो अगर पक्का सितारे तोड़ लाएँ हम
इरादा हो अगर पक्का सितारे तोड़ लाएँ हम
आर.एस. 'प्रीतम'
■ दोहा देव दीवाली का।
■ दोहा देव दीवाली का।
*Author प्रणय प्रभात*
*दिलों से दिल मिलाने का, सुखद त्योहार है होली (हिंदी गजल/ गी
*दिलों से दिल मिलाने का, सुखद त्योहार है होली (हिंदी गजल/ गी
Ravi Prakash
2866.*पूर्णिका*
2866.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Yesterday ? Night
Yesterday ? Night
Otteri Selvakumar
मझधार
मझधार
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
मारे ऊँची धाक,कहे मैं पंडित ऊँँचा
मारे ऊँची धाक,कहे मैं पंडित ऊँँचा
Pt. Brajesh Kumar Nayak
चाहते नहीं अब जिंदगी को, करना दुःखी नहीं हरगिज
चाहते नहीं अब जिंदगी को, करना दुःखी नहीं हरगिज
gurudeenverma198
बिना काविश तो कोई भी खुशी आने से रही। ख्वाहिश ए नफ़्स कभी आगे बढ़ाने से रही। ❤️ ख्वाहिशें लज्ज़त ए दीदार जवां है अब तक। उस से मिलने की तमन्ना तो ज़माने से रही। ❤️
बिना काविश तो कोई भी खुशी आने से रही। ख्वाहिश ए नफ़्स कभी आगे बढ़ाने से रही। ❤️ ख्वाहिशें लज्ज़त ए दीदार जवां है अब तक। उस से मिलने की तमन्ना तो ज़माने से रही। ❤️
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
कुछ लोग बहुत पास थे,अच्छे नहीं लगे,,
कुछ लोग बहुत पास थे,अच्छे नहीं लगे,,
Shweta Soni
"पाठशाला"
Dr. Kishan tandon kranti
हिन्दू जागरण गीत
हिन्दू जागरण गीत
मनोज कर्ण
आम आदमी
आम आदमी
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
पुष्पों की यदि चाह हृदय में, कण्टक बोना उचित नहीं है।
पुष्पों की यदि चाह हृदय में, कण्टक बोना उचित नहीं है।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
आप आजाद हैं? कहीं आप जानवर तो नहीं हो गए, थोड़े पालतू थोड़े
आप आजाद हैं? कहीं आप जानवर तो नहीं हो गए, थोड़े पालतू थोड़े
Sanjay ' शून्य'
बच्चों के साथ बच्चा बन जाना,
बच्चों के साथ बच्चा बन जाना,
लक्ष्मी सिंह
* पानी केरा बुदबुदा *
* पानी केरा बुदबुदा *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
हमें सूरज की तरह चमकना है, सब लोगों के दिलों में रहना है,
हमें सूरज की तरह चमकना है, सब लोगों के दिलों में रहना है,
DrLakshman Jha Parimal
जो किसी से
जो किसी से
Dr fauzia Naseem shad
पत्ते बिखरे, टूटी डाली
पत्ते बिखरे, टूटी डाली
Arvind trivedi
गुलाब के अलग हो जाने पर
गुलाब के अलग हो जाने पर
ruby kumari
झरते फूल मोहब्ब्त के
झरते फूल मोहब्ब्त के
Arvina
लोगो का व्यवहार
लोगो का व्यवहार
Ranjeet kumar patre
वैश्विक जलवायु परिवर्तन और मानव जीवन पर इसका प्रभाव
वैश्विक जलवायु परिवर्तन और मानव जीवन पर इसका प्रभाव
Shyam Sundar Subramanian
फिसल गए खिलौने
फिसल गए खिलौने
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
তুমি এলে না
তুমি এলে না
goutam shaw
Loading...