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21 Jun 2023 · 1 min read

अब क्या बताएँ छूटे हैं कितने कहाँ पर हम ग़ायब हुए हैं खुद ही

अब क्या बताएँ छूटे हैं कितने कहाँ पर हम ग़ायब हुए हैं खुद ही के ज़मीं आसमां से हम
ना सोच कि ‘नीलम’ नामा-ओ-पैग़ाम से छूटे
देख तुझमें ही तो छूटे हैं यहाँ से वहाँ तक हम
नीलम शर्मा ✍️
नामा-ओ-पैग़ाम-पत्रों का आदान प्रदान

3 Likes · 2 Comments · 386 Views
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