Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Jul 2016 · 1 min read

~~!!अबोध बालपन!!~~

~~!!अबोध बालपन!!~~
*******************
“स्वयं के,
असुरक्षित भविष्य से,
अनजान!

गैर जिम्मेदाराना,
परवरिश से,
हैरान!

बचपन नादान,
है कैसा यह
विधि का विक्षिप्त विधान!!”____दुर्गेश वर्मा

Language: Hindi
Tag: कविता
434 Views
You may also like:
उसके मेरे दरमियाँ खाई ना थी
Khalid Nadeem Budauni
चलना हमें होगा
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
'शशिधर'(डमरू घनाक्षरी)
Godambari Negi
“MAKE FRIENDS QUICKLY, IF YOU DON’T LIKE THEM, UNFRIEND”
DrLakshman Jha Parimal
दो लफ़्ज़ मोहब्बत के
Dr fauzia Naseem shad
✍️आईने लापता मिले✍️
'अशांत' शेखर
तुम हमको भूल ही गए।
Taj Mohammad
*अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के इतिहास का एक दुर्लभ...
Ravi Prakash
प्रियतम
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
बचपन
Anamika Singh
Advice
Shyam Sundar Subramanian
महंगाई के दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
काँच के टुकड़े तख़्त-ओ-ताज में जड़े हुए हैं
Anis Shah
माई थपकत सुतावत रहे राति भर।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
भारतीय संस्कृति और उसके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
सर्दी जुकाम का आयुर्वेदिक उपचार
लक्ष्मी सिंह
रह गया मैं सिर्फ " लास्ट बेंच "
Rohit yadav
शृंगार छंद और विधाएं
Subhash Singhai
दोहा
Dr. Sunita Singh
भाग्य हीन का सहारा कौन ?
ओनिका सेतिया 'अनु '
✍️ईश्वर का साथ ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
मै भी हूं तन्हा, तुम भी हो तन्हा
Ram Krishan Rastogi
अपनापन
shabina. Naaz
" मीनू की परछाई रानू "
Dr Meenu Poonia
ये वो नहीं है .....!
Buddha Prakash
तुम साथ अगर देते नाकाम नहीं होता
Dr Archana Gupta
अगर तुम सावन हो
bhandari lokesh
हे सड़क तुम्हें प्रणाम
मानक लाल"मनु"
लगदी तू मुझकों कमाल sodiye
D.k Math { ਧਨੇਸ਼ }
छाँव पिता की
Shyam Tiwari
Loading...