Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jun 2023 · 1 min read

अपनाना है तो इन्हे अपना

अपनाना है तो इसे अपना
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
माता-पिता को अपनाओ
जिसने रंगीन दुनिया दिखाई

अपनाना तो भाई बहनअपना
दोनों हो सुख-दुख में साथी

बचपन खेला एक साथ पढ़ा
लिखा मां पिता घर द्वारे से

जीवन सपना संजोया भी
मां के नीले अंबर आंगन में

हँसते हँसते घर बसाया दोनों
अपनाना तो बहन भाई अपना

पढ़ लिख स्कूल पाठशाला
आश्रम में योग्य हो होदा पाया

अपनाना हो तो गुरु आचार्य
जिसने इस लायक बना संसार
में जीने का सुंदर राह दि दिखाया

अपना ना हो तो उस मिट्टी को
जहां जीवन का पहला आहार

समाज जहां समाजिकता धर्म
नें वतन से प्यार करना सिखाया

मिट्टी खातिर जहां वीरो ने प्राण
गमाया शहादतों से परंतत्रता को

मार स्वतंत्रता पा भारत माता की
विंदिया को चमकाया जिसनें

निज चुनरी मलमल चादर से
कदमों नीचे कालीन सी बिछा

सकुन सुखद राह बनाया है
अपनाना हो मातृभूमी को

हॅस खुश प्यार से भारत
अभिमान बढ़ाना सीखो

प्यार दिल फूलों को मुरझाने ना
देना मुरझा हुआ खिलता नहीं

जीवन बीता गाँवो में पर प्यार
वसा तेरे दिलो में प्रेम प्यारी

कनक कंचनी कजरी नयनी
फेरे सात ले जिसने संग जीने

मरने अटल एक कसमें वादे की
हँसना है तो इसे अपना कर हँसो

मधुर जीवन एक अरमान बना
अपनाना है तो कला जीने की

अपना सपना पूरा कर जीओ
जग जीवन इतिहास बनो ॥

🌿🌿🌷🥀♥️🥀🌷🌿🌿

तारकेश्‍वर प्रसाद तरूण

Language: Hindi
1 Like · 142 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
View all
You may also like:
अगर कभी मिलना मुझसे
अगर कभी मिलना मुझसे
Akash Agam
नवजात बहू (लघुकथा)
नवजात बहू (लघुकथा)
गुमनाम 'बाबा'
खुश्क आँखों पे क्यूँ यकीं होता नहीं
खुश्क आँखों पे क्यूँ यकीं होता नहीं
sushil sarna
क्रिकेट का पिच,
क्रिकेट का पिच,
Punam Pande
*सरस्वती वन्दना*
*सरस्वती वन्दना*
Ravi Prakash
23/156.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/156.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
" जब तुम्हें प्रेम हो जाएगा "
Aarti sirsat
पृष्ठों पर बांँध से
पृष्ठों पर बांँध से
Neelam Sharma
लोकतंत्र का महापर्व
लोकतंत्र का महापर्व
नवीन जोशी 'नवल'
ज़माना
ज़माना
अखिलेश 'अखिल'
पाप का भागी
पाप का भागी
Dr. Pradeep Kumar Sharma
उन्होंने कहा बात न किया कीजिए मुझसे
उन्होंने कहा बात न किया कीजिए मुझसे
विकास शुक्ल
मुक्तक-विन्यास में रमेशराज की तेवरी
मुक्तक-विन्यास में रमेशराज की तेवरी
कवि रमेशराज
ये जाति और ये मजहब दुकान थोड़ी है।
ये जाति और ये मजहब दुकान थोड़ी है।
सत्य कुमार प्रेमी
ज़िन्दगी नाम है चलते रहने का।
ज़िन्दगी नाम है चलते रहने का।
Taj Mohammad
करनी होगी जंग
करनी होगी जंग
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
मीना
मीना
Shweta Soni
कर सत्य की खोज
कर सत्य की खोज
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
तन्हाई
तन्हाई
Sidhartha Mishra
खिड़कियां हवा और प्रकाश को खींचने की एक सुगम यंत्र है।
खिड़कियां हवा और प्रकाश को खींचने की एक सुगम यंत्र है।
Rj Anand Prajapati
परो को खोल उड़ने को कहा था तुमसे
परो को खोल उड़ने को कहा था तुमसे
ruby kumari
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
*यूँ आग लगी प्यासे तन में*
*यूँ आग लगी प्यासे तन में*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मित्र दिवस पर आपको, सादर मेरा प्रणाम 🙏
मित्र दिवस पर आपको, सादर मेरा प्रणाम 🙏
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
■ अब सब समझदार हैं मितरों!!
■ अब सब समझदार हैं मितरों!!
*प्रणय प्रभात*
क्रोधी सदा भूत में जीता
क्रोधी सदा भूत में जीता
महेश चन्द्र त्रिपाठी
वो लम्हें जो हर पल में, तुम्हें मुझसे चुराते हैं।
वो लम्हें जो हर पल में, तुम्हें मुझसे चुराते हैं।
Manisha Manjari
"यथार्थ प्रेम"
Dr. Kishan tandon kranti
बंधन यह अनुराग का
बंधन यह अनुराग का
Om Prakash Nautiyal
Loading...