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26 Apr 2023 · 1 min read

“अनकही सी ख़्वाहिशों की क्या बिसात?

“अनकही सी ख़्वाहिशों की क्या बिसात?
जब कही बातें पशेमां हो चुकीं।।”

★प्रणय प्रभात★

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