Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Mar 2024 · 1 min read

अधखिली यह कली

अधखिली यह कली , जो खिलती कभी ।
तोड़ डाला इसे , जालिमों ने अभी ।।
यह तो मिटने चली , जो महकती कभी ।
अधखिली यह कली ————————-।।

यह डोली यहाँ जिसकी , सजने लगी है ।
यह शहनाई यहाँ जो , बजने लगी है ।।
अभी तो है बचपन, उम्र खेलने की ।
बन गई है दुल्हन ,मेहंदी इसके लगी है ।।
दे रहे हैं विदाई , इसको सभी ।
मिट गए इसके अरमां , आज सभी ।।
अधखिली यह कली ————————-।।

यह किसको सुनाये , कहानी अपनी ।
बैठी रहती है खामोश , गुमशुम बनी ।।
इसके सपनों से मतलब , किसी को नहीं ।
यह तो व्यापार की एक ,वस्तु बनी ।।
लगी है नजर इसके , हुस्न पर ।
कर रहे हैं इसी का , सौदा सभी ।।
अधखिली यह कली ————————–।।

नहीं इसका नसीब , हक जताये अपना ।
आसमां को उड़े , तोड़ पहरा अपना ।।
इसके दुश्मन नहीं और , अपने ही है ।
अब बताये किसे यह , दर्द अपना ।।
यह बनकर शमां , करती रोशनी ।
मगर इसको तो , बुझा दिया अभी ।।
अधखिली यह कली ——————————।।

शिक्षक एवं साहित्यकार-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

Language: Hindi
Tag: गीत
72 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*चैतन्य एक आंतरिक ऊर्जा*
*चैतन्य एक आंतरिक ऊर्जा*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ये धोखेबाज लोग
ये धोखेबाज लोग
gurudeenverma198
*निकला है चाँद द्वार मेरे*
*निकला है चाँद द्वार मेरे*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
बहुत यत्नों से हम
बहुत यत्नों से हम
DrLakshman Jha Parimal
🥀 *अज्ञानी की कलम* 🥀
🥀 *अज्ञानी की कलम* 🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
दोहा
दोहा
दुष्यन्त 'बाबा'
वतन के तराने
वतन के तराने
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
किसान आंदोलन
किसान आंदोलन
मनोज कर्ण
के कितना बिगड़ गए हो तुम
के कितना बिगड़ गए हो तुम
Akash Yadav
2865.*पूर्णिका*
2865.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
18)”योद्धा”
18)”योद्धा”
Sapna Arora
शब्द
शब्द
Paras Nath Jha
"UG की महिमा"
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
"असली-नकली"
Dr. Kishan tandon kranti
Dard-e-Madhushala
Dard-e-Madhushala
Tushar Jagawat
"कूँचे गरीब के"
Ekta chitrangini
एक शेर
एक शेर
Ravi Prakash
रेत पर मकान बना ही नही
रेत पर मकान बना ही नही
कवि दीपक बवेजा
सर्द हवाएं
सर्द हवाएं
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
प्यार
प्यार
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
पुरानी खंडहरों के वो नए लिबास अब रात भर जगाते हैं,
पुरानी खंडहरों के वो नए लिबास अब रात भर जगाते हैं,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
शोषण खुलकर हो रहा, ठेकेदार के अधीन।
शोषण खुलकर हो रहा, ठेकेदार के अधीन।
Anil chobisa
स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
संवरना हमें भी आता है मगर,
संवरना हमें भी आता है मगर,
ओसमणी साहू 'ओश'
छीज रही है धीरे-धीरे मेरी साँसों की डोर।
छीज रही है धीरे-धीरे मेरी साँसों की डोर।
डॉ.सीमा अग्रवाल
मन ही मन में मुस्कुराता कौन है।
मन ही मन में मुस्कुराता कौन है।
surenderpal vaidya
दिल तमन्ना कोई
दिल तमन्ना कोई
Dr fauzia Naseem shad
राग द्वेश से दूर हों तन - मन रहे विशुद्ध।
राग द्वेश से दूर हों तन - मन रहे विशुद्ध।
सत्य कुमार प्रेमी
Kabhi kitabe pass hoti hai
Kabhi kitabe pass hoti hai
Sakshi Tripathi
गरिमामय प्रतिफल
गरिमामय प्रतिफल
Shyam Sundar Subramanian
Loading...