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Author: RASHMI SHUKLA

RASHMI SHUKLA
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mera majhab ek hai insan hu mai

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

तनहा हुए हैं आज वो

तनहा हुए हैं आज वो महफ़िल, की जिन्हे आदत थी, शौके मज़बूरी बन गया [...]

मुझे तो बस तेरी खामियों से ही प्यार है,

सुधर भी जाये ये जमाना तो मेरे किस काम का, मुझे तो बस तेरी [...]

तेरी याद में जिंदगी रही है संवर धीरे धीरे

तेरी याद में जिंदगी रही है संवर धीरे धीरे, सौबत का तेरी हो रहा [...]

किताब हूँ जैसे मै

किताब हूँ जैसे मै कोई खोलकर वो मुझे पढता ही गया, हम थे ठहरे [...]

आज मन फिर हुआ है कंवारा प्रिये

आज मन फिर हुआ है कंवारा प्रिये, आज मौसम भी लगता है प्यारा [...]

जब से छोड़ा है तूने साथ

जब से छोड़ा है तूने साथ हमने संभलना सीख लिया है, मौसम के जैसा [...]

कहीं तो महफूज रखो

कहीं तो महफूज रखो मुझे अपने घराने में, कहीं उम्र न बीत जाए खुद [...]

जीते तो हम आज भी हैं

जीते तो हम आज भी हैं तेरे बिना मगर कोई कमी सी खलती है, सारे [...]

बेवफाई वफ़ा में बदलेगी जरूर

बेवफाई वफ़ा में बदलेगी जरूर एक बार उन्हें मेरे करीब आने तो [...]

हमारा हिंदुस्तान

आज देखा माता की चौकी को एक मुस्लिम दे रहा था सहारा, वो अपना [...]

उनकी आजमाइश

वक़्त की आजमाइश में वो खुद की नुमाइश कर बैठे, जिसको पाने की हम [...]

तुम्ही बता दो

कितना और कब तक तुम्हे आजमाऊ तुम्ही बता दो, हमेशा तो झुकाया है [...]

हमारा अंदाज

हम कोई बड़ा आसमां नहीं जो तुम हमे छूने को भी मोहताज़ हो, बस खुद [...]

किस्सा

लड़ते नहीं हम तुमसे यू ही दानिश्ता, ये भी हमारी मोहब्बत का एक [...]

मेरा गुमान

छिन गया वो इख़्तियार मुझसे जिसपे कभी हुआ करता था गुमान, गवारा [...]

जुदाई

ए मेरे मालिक एक ऐसा भी आइना बना दे, जिसमे सूरत के साथ इंसान की [...]

हम दोनों की पाक मोहब्बत

वो कहते हैं हमे मोहब्बत का अंदाजे बयां नहीं आता है, मगर मेरे [...]

बेबस

क्या फर्क पड़ता है वो हँसे या रोये, उन्हें तो बस उसके जिस्म से [...]

प्यार अभी बाकी है

गर आज भी उनकी बातों में जिक्र हो मेरी फ़िक्र का, तो समझ लेना की [...]

भगवान का व्यापार

जिसने बनाया है ये सारा संसार, उसी को लोगो ने बना लिया है [...]

जिक्रे उल्फत

जिक्रे उल्फत का कुछ ऐसा नजारा था, मेरा सारा वक़्त उनका और उनका [...]

अयोध्या मुद्दे पर मेरी कुछ पंक्तियाँ

क्यों मंदिर और मस्जिद के मुद्दे को इतना प्रबल बनाया है, जबकि [...]

उनका दखल

दानिश्ता (जानबूझकर) ही वो मेरी जिंदगी में दखल देते हैं, मेरे [...]

हौसला

बदलते वो हैं जो अपने मन में संभलने की चाह रखते हैं, सपनों को [...]

ये जीवन है अनमोल

समझ आता ही नहीं किस चीज की जरुरत है इंसान को, बिना मतलब की चीज़ [...]

तुम्हारा साथ

बिखर जाना ही पड़ेगा गर छोड़ा तुमने मेरा साथ, दूर जाकर देख लो [...]

उनकी अब्र सी नफरत

उनकी नफरत भी मुझे अब्र सी लगती है, उनकी बेरुखी मुझे मीठा सब्र [...]

काबिले तारीफ

काबिले तारीफ तो उनका हुनर था बेबवफाई का, भनक तक न लगने दी और [...]

होली पे कुछ नया

HAPPY HOLI चलो इस बार होली पे कुछ अजब कुछ नया करते हैं, नए कपडे न सही [...]

ये जीवन

तशरीफ़ को अपनी तकलीफ न दो मेरे आशियाने में आने के लिए, मैंने तो [...]