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Author: RASHMI SHUKLA

RASHMI SHUKLA
Posts 25
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mera majhab ek hai insan hu mai

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

भगवान का व्यापार

जिसने बनाया है ये सारा संसार, उसी को लोगो ने बना लिया है [...]

जिक्रे उल्फत

जिक्रे उल्फत का कुछ ऐसा नजारा था, मेरा सारा वक़्त उनका और उनका [...]

अयोध्या मुद्दे पर मेरी कुछ पंक्तियाँ

क्यों मंदिर और मस्जिद के मुद्दे को इतना प्रबल बनाया है, जबकि [...]

उनका दखल

दानिश्ता (जानबूझकर) ही वो मेरी जिंदगी में दखल देते हैं, मेरे [...]

हौसला

बदलते वो हैं जो अपने मन में संभलने की चाह रखते हैं, सपनों को [...]

ये जीवन है अनमोल

समझ आता ही नहीं किस चीज की जरुरत है इंसान को, बिना मतलब की चीज़ [...]

तुम्हारा साथ

बिखर जाना ही पड़ेगा गर छोड़ा तुमने मेरा साथ, दूर जाकर देख लो [...]

उनकी अब्र सी नफरत

उनकी नफरत भी मुझे अब्र सी लगती है, उनकी बेरुखी मुझे मीठा सब्र [...]

काबिले तारीफ

काबिले तारीफ तो उनका हुनर था बेबवफाई का, भनक तक न लगने दी और [...]

होली पे कुछ नया

HAPPY HOLI चलो इस बार होली पे कुछ अजब कुछ नया करते हैं, नए कपडे न सही [...]

ये जीवन

तशरीफ़ को अपनी तकलीफ न दो मेरे आशियाने में आने के लिए, मैंने तो [...]

दुनियां का आइना

तशरीफ़ को अपनी तकलीफ न दो मेरे आशियाने तक आने के लिए, मैंने तो [...]

मेरा सफर

जब भी हम सफर में जाया करते हैं, हर बार कुछ नया पाया करते [...]

ए मेरे मालिक

ए मालिक मुझे इतना कामयाब बना दे, मेरे अपनों के लिए मुझे तोहफा [...]

सरकार की राजनीती

एक तरफ तो सरकार का ये नारा है, की भ्रष्टाचार रोकना संकल्प [...]

नारी और पुरुष

अगर नारी सम्मान की हक़दार है, तो पुरुष को भी सम्मान का अधिकार [...]

उनकी अनजान मोहब्बत

उनका हर एहसास हमे अनजान सा लगता है, न जाने क्यों हमे उनका साथ [...]

उनका शाही अंदाज

कब तक रहते हैं वो हमसे नाराज देखना है, मेरे बिना बेहतर होता [...]

जिंदगी का अजीब सफर

जिंदगी का भी अजीब सफर है, न है वक़्त का पता न ही कोई सीधी डगर [...]

उनकी जिद

समझ आया ही नहीं कभी हमे उनका शौके मिजाज, और वो बने रहे बस खुद [...]

एक सिपाही

क्या जीवन है बॉर्डर पे तैनात एक जवान का, न मजहब का पता है उसके [...]

कोई गैर

बेशक वो गैर हैं हमारे लिए, मगर अपनों ने भी कहाँ सहारा दिया [...]

मेरा सफर

जब भी हम सफर में जाया करते हैं, हर बार कुछ नया पाया करते [...]

माँ मुझे संसार दिखाओ

बेटी कहती है माँ से क्यों सबकी सुना करती हो, मुझे क्यों सबके [...]

मेरा अनोखा अनुभव

आज जब हम गंगा दर्शन को जा रहे थे, पैर न जाने क्यों इतना घबरा [...]