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Author: Khoob Singh 'Vikal'

Khoob Singh 'Vikal'
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मेरी बातों से आप का सहमत होना जरुरी नहीं, आप ने मेरी बातों को पढ़ा इसके लिए हृदय से आपका अनंत साधुवाद...

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

‘मुक्त’

आज कर दिया तुम्हें अपनी 'कैद' से 'मुक्त'। 'भविष्य' बना सको तुम, [...]

‘सुबह’

सुबह की पहली किरण तुम्हें जगा रही है, ठंडी-ठंडी पवन ताज़गी [...]

स्वप्न

स्वप्न पूर्ण हो आपके, जो भी दिखें न्यारे। रात हुई है बहुत, अब [...]

उठो, जागो

उठो, जागो लक्ष्य पूर्ति को निकल पड़ों तुम। चुनौतियों से [...]

सुबह मुबारक

आज की तिथि मुबारक हो तुम्हें, आज का दिन मुबारक हो [...]

इश्क

जिन्दा रहना इश्क में, 'विकल' नहीं आसान। हँसी-खेल अब इश्क को, [...]

चापलूसी

चापलूसी में चापलूसों को कर दिया कुछ ने फेल। सत्ता प्राप्ति [...]

‘इश्क’

'इश्क' में फना होना भी आसान नहीं 'विकल'। जिंदगी को 'इश्क' समझ जी [...]

विकल

मैं तो सागर हूं, हजारों नदियां मुझ में गिर कर अपना [...]