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Author: ishwar jain

ishwar jain
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

।। रक्षाबन्धन ।।

सावन की हरियाली और रंग बिरंगी राखियों के अनुपम संयोग से बना [...]

तुमने कहा था

एक शाम सागर के वीरान किनारे पर तुमने कहा था- मेरे प्यार की [...]

आदाब अर्ज़ है

अब मैं समझा तेरे रूठने का सबब। अदाएं वो महज थीं, मेरे कत्ल की [...]

मेरी कविता…. ।। अमीरी और गरीबी ।।

अमीरी और गरीबी समाज के दो पहलू तस्वीर के दो [...]

आज का मानव

विधाता ने कलियुगी मानव की हृदयभूमि में पाप के बीज डाले [...]

आदाब अर्ज़ है

दरिया ए अश्क़ काफी हैं बहने के लिए - दास्तां ए इश्क काफी हैं [...]

कविता किया करता हूँ

ऊषाकालीन रश्मियों में सर्दी की रंगीनियों में छत पे बैठकर जब [...]

मुक्ति

गुलामी की बेड़ियों पर क्रान्ति की हवा और ज़ुल्म की बरसात ने [...]