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Author: रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव

रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव
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मैकेनिकल इंजिनियर, सम्प्रति वाराणसी में लो नि वि में कार्यरत

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

बयाँ-ए-कश्मीर

मैंने कहा कि धरती की है स्वर्ग ये जगह उसने कहा की अब तुम्हारी [...]

ग़ज़ल

क्यूँ नज़र से नज़ारे जुदा हो गये लग रहा खुद नज़र में खुदा हो [...]

ग़ज़ल

जिस तरह मसला बने है अब खुदा भी, राम भी दूर का मुददा नहीं इस [...]

ज़िन्दगी बन कर कहानी रह गई

ज़िन्दगी बन कर कहानी रह गई ज्यूँ बुढ़ापे सी जवानी रह गई दर [...]

तू बता , तू मुझे मिला कब है

तू बता तू मुझे मिला कब है हूँ इन्तज़ार में गिला कब है रात हो [...]