हे नव प्रात
मत्तगयंद सवैया छंद -------------------------------------- मापनी-211/ 211/211/211, 211/211/211/22 हे नव प्रात! सदा नव जीवन, लेकर नित्य धरा पर आना। सूरज की किरणें बिखरा कर, अंतस के तम को हर जाना। हो...
Hindi · गीतिका · मत्तगयंद सवैया · विहान/भोर