मनोज शर्मा Language: Hindi 107 posts Sort by: Latest Likes Views List Grid Previous Page 2 Next मनोज शर्मा 16 Apr 2021 · 2 min read प्रवचन सामने प्रवचन चल रहा है कोई प्रसिद्ध महात्मा आत्मा परमात्मा पर अपना मंतव्य दे रहे हैं उनको सुनने देखने के लिए खासी भीड़ है परिवार मित्र मंडली सब इधर उधर... Hindi · लेख 1 505 Share मनोज शर्मा 28 Mar 2021 · 1 min read आलू आलू आलू सार्वभौम है अति प्राचीन काल से इसको देखा गया है और जमीं से जुड़ा निराला प्यारा वैज।सब्जी तरकारी में छोटों बड़ों की पहली पसंद ,जाने कितनी सब्जियां आई... Hindi · लेख 1 2 472 Share मनोज शर्मा 28 Mar 2021 · 1 min read एक पल आओ क्षण भर बैठो देखो तो सही वक्त नहीं बदला हां पर तुम बदल गये हो अब न कोई प्रणय और न ही कोई विस्तार प्रेम का दुःख का स्नेह... Hindi · कविता 1 3 449 Share मनोज शर्मा 28 Mar 2021 · 1 min read चौराहा आज गली के चौराहे पर भीड़ थी कोई जा रहा था कहीं कोई कहीं से आ रहा था आते जाते लोगों के मध्य कहीं भटक गया चौराहा पीठ के बल... Hindi · कविता 414 Share मनोज शर्मा 28 Mar 2021 · 1 min read मैं मैं नहीं तुम तुम नहीं हम साथ साथ हम तुम आज तुम नहीं मैं सिर्फ मैं मनोज शर्मा Hindi · कविता 369 Share मनोज शर्मा 8 Jan 2021 · 1 min read मोहन राकेश के जन्मदिवस पर कोई चेहरा और चेहरे के पीछे की सादगी हृदय पटल पर ख़ास प्रभाव छोड़ जाती है उसी तरह जैसे काग़ज़ों पर खींची रेखाओं में बोलते किरदार।मोहन राकेश आज 96 के... Hindi · लेख 2 1 280 Share मनोज शर्मा 7 Jan 2021 · 4 min read कोरोना एक कटु सत्य कोविड-19 एक वैश्विक आपदा है जिसने संपूर्ण विश्व के लोगों को घरों में बंद कर दिया है।सारा मीडिया जगत ही नहीं बल्कि हर ज़ुबां पर एक ही नाम है कोरोना।कोरोना... "कोरोना" - काव्य प्रतियोगिता · कविता 5 25 693 Share मनोज शर्मा 7 Jan 2021 · 1 min read मोहन राकेश आज भी! उसकी आंखों पर मोटा काला चश्मा है घुंघराले बालों का पफ और बंद अधरों की गहरी ख़ामोशी बहुत कुछ कह जाती है।एक घुम्मकड़ असंतुष्ट चरित्र जो ना केवल काग़जों पर... Hindi · लेख 1 274 Share मनोज शर्मा 2 Dec 2020 · 1 min read कविता कविता मन का अंतर्द्वंद्व है जो काग़ज़ों पर आते ही सजीव-सा लगता है।आसमां में ठहरे बादल बहुत कुछ कहते हैं उद्यान में खिले पुष्प महकते हुए बोलते हैं जो देखते... Hindi · लेख 1 1 558 Share मनोज शर्मा 21 Nov 2020 · 1 min read आनंद आनंद अंतर्मुखी होता है जिसमें असीम सुख छिपा होता है।मन चंचल है जो पूर्ण वेग से इधर ऊधर भागता है।कहीं तृप्ति नहीं!ना पूर्णता है ना प्रकाश पर फिर भी मन... Hindi · लेख 1 1 346 Share मनोज शर्मा 21 Nov 2020 · 1 min read हंसी हंसी मानों होठों पर तैरती थी जैसे ही होठ हंसी से फैलते उसके कंधे उचकते और आंखे खिल जाती थी।कुछ साल पहले वो हर पल मुझे ढूंढतें थे स्वप्न में... Hindi · लेख 2 545 Share मनोज शर्मा 21 Nov 2020 · 1 min read सुबह का सूरज गांव में आज भी घर के आहते से ड्योढ़ी से या गली के दायिनी छोर से उसे साफ-साफ देखा जा सकता है। सुबह से शाम तक जाने कितनी मर्तवा उसे... Hindi · लेख 2 493 Share मनोज शर्मा 28 Oct 2020 · 1 min read अक्टूबर की सुबह अक्टूबर की सूबह! सुबह सात बज गये पर धूप कहीं नहीं यही आलम जून-जुलाई में हो तो बात ही कुछ और हो।नीले आकाश में ठहरे सफेद पुष्ट बादल मानो बड़ी... Hindi · कविता 1 240 Share मनोज शर्मा 26 Oct 2020 · 1 min read प्रेमचंद प्रेमचंद ने पात्रों की संकल्पना उनके चरित्र के अनुरूप की है यथा बुधिया,मुलिया,घीसू या गोबर ये सब दीन-हीन है जो भरसक प्रयास करने पर भी उन्नीस ही दिखते हैं पर... Hindi · लेख 1 480 Share मनोज शर्मा 11 Oct 2020 · 1 min read शाम शाम हो गयी बालकाॅनी से बाहर झांकर देखा।धूप अभी भी है पर जहां छांव है वहां मौसम उतना ऊष्म नहीं जितनी सफेद धूप को निहारने से लगता है।सामने दरीचे पर... Hindi · कहानी 2 455 Share मनोज शर्मा 9 Oct 2020 · 1 min read काला कऊआ उस रोज़ हम दो मैं और वो काला कऊआ उस टीले पर बैठे थे निरस्त से कहीं खोये खोये से अजनबी बन उसने मुझे देखा मैंने उसे वो गुमसुम था... Hindi · कविता 2 382 Share मनोज शर्मा 8 Oct 2020 · 1 min read रोशनी दरम्याना रोशनी में लगा कि कोई साया मुझे ताक रहा है!गहरी हंसी गूंज गयी और फिर लंबा अटहास देर तक दूर तक वहीं कहीं गूंजता रहा। बंद खिड़की के शीशों... Hindi · लेख 2 439 Share मनोज शर्मा 8 Oct 2020 · 1 min read अनुभव परिवर्तन जीवन का नियम है पर क्यों लगता है कि जीवन एक सांचे में ढल गया है।कुछ नया नहीं सब रोज़-सा।सामने वही एक-से थके चेहरे नेत्र अलसाये से!सब मिट्टी के... Hindi · लेख 353 Share मनोज शर्मा 5 Oct 2020 · 1 min read साया दरम्याना रोशनी में लगा कि कोई साया मुझे ताक रहा है!गहरी हंसी गूंज गयी और फिर लंबा अटहास देर तक दूर तक वहीं कहीं गूंजता रहा। बंद खिड़की के शीशों... Hindi · लेख 1 261 Share मनोज शर्मा 1 Oct 2020 · 1 min read सुबह सूर्य की पहली किरण और फैलता धूंधला मटियाला-सा रेत!नदी का गंधला बहता शीतल नीर और नीचे की उतरती सीढ़ियों में भीगते पांव जिनके भीगते ही सारे रोये मानो रोमांचित हो... Hindi · लेख 1 246 Share मनोज शर्मा 29 Sep 2020 · 1 min read बेवक्त पहले दिन भर और फिर देर रात तक इंतज़ार रहता है कि व्यस्तता टूटे पर व्यस्तता का अंत नहीं होता।सारे काम समय पर होते हैं खाना सोना ऊठना बग़ैरह पर... Hindi · लेख 2 236 Share मनोज शर्मा 29 Sep 2020 · 1 min read बूंद बालकाॅनी की परिधि में बादल घिरे हैं पर आसमां में अभी भी सफेदी है जाने कब बरस जाए? दूर कहीं बहता समीर पेड़ों की हरी परत को और गहरा करने... Hindi · लेख 1 462 Share मनोज शर्मा 28 Sep 2020 · 1 min read प्रकृति प्रकृति का क्रोध शांत कछारों को झकझोर देता है एक तेज आंधी!आवेग!या कहर जिससे फिर कोई अछूता नहीं रह पाता।गौधुली में वो शांत थी पर जाने क्यों उसने रोद्र रूप... Hindi · लेख 4 471 Share मनोज शर्मा 28 Sep 2020 · 1 min read पिता वो चुप सा आज खामोश क्यों है शांत चित बेजान सा क्यों है दूर क्षितिज को ताकती पथराई बंद आंखे गुमसुम धरा स्याह सन्नाटा चारो तरफ फैलता विषाद करूण सिसकिया... Hindi · कविता 3 244 Share मनोज शर्मा 27 Sep 2020 · 2 min read चेहरे एक ही शख्स जीवन में कई चेहरे लिए जीता है पर हर चेहरे से दूसरों को लालायित करने की कोशिश में वो स्वयं को मिटा देता है।वास्तव में चेहरा कोई... Hindi · लेख 1 433 Share मनोज शर्मा 26 Sep 2020 · 1 min read रेत सूखे रेत पर एक मर्तवा भी बारिश की बूंदे पड़ जाए तो बूंदों के निशां तब तक रहते है जबतक कि कोई वहां से गुज़र न जाए।वो पूछते हैं कि... Hindi · लेख 3 249 Share मनोज शर्मा 26 Sep 2020 · 1 min read लल्ली शीरू तुम तो कहते थे! मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं फिर इतनी छोटी सी ख्वाइश पूरी नहीं कर सकते?विड़ियो काॅलिंग पर बात करते हुए दोनों के चेहरे स्तब्ध... Hindi · लघु कथा 2 243 Share मनोज शर्मा 25 Sep 2020 · 1 min read लत कल रात टीवी पर एक ज्ञानवर्धक डाॅक्यूमैंटरी देखी पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ पर थोड़े अंतराल पर यथार्थ देखकर आंखे फटी रह गयी।आज हर जगह मोबाइल फोन्स का वर्चस्व... Hindi · लेख 1 2 248 Share मनोज शर्मा 24 Sep 2020 · 1 min read मंटो उस रोज़ घर में घुसते ही सब कुछ अस्त व्यस्त मिला सारा सामान इधर उधर बिखरा था।दरवाजे पर मोंदा गिलास था कंघा कुर्सी के नीचे और बिस्तर पर गहरी सलवटे... Hindi · कहानी 3 327 Share मनोज शर्मा 24 Sep 2020 · 1 min read Me! शीशे में स्वयं के अक्ष को देखते हुए मैंने बालों के गुच्छें सफेद बालों की एक छिपी क्यारी को पाया।मैं स्वयं को शीशे के करीब ले जाता गया और लगा... Hindi · लेख 2 262 Share मनोज शर्मा 24 Sep 2020 · 1 min read वृक्ष वृक्ष का धर्म क्या है जहां कहीं खड़ा हो वहीं से शीतलता व उन्नत पुष्प तथा फल प्रदान करे वो कभी दूसरे की निंदा नहीं करते और ना ही ईष्या... Hindi · लेख 3 496 Share मनोज शर्मा 24 Sep 2020 · 1 min read संबंध संबंध और संबंधों का निर्वाह महज इतना कि संबंध दिखाई दे शायद इससे अधिक कुछ नहीं।किसी को याद तब ही किया जाता है जब ज़रूरत है एक अंतराल के बाद... Hindi · लेख 1 584 Share मनोज शर्मा 24 Sep 2020 · 1 min read कोविड में भीख रोटी खाओगे?वाक्य सुनते ही जैसे वो निढ़ाल हो गया।आंखे खिल गयी होठ फैलने लगे।आज तो पेट भर गया पर कल?ये सोचकर उसने अपना सिर पकड़ लिया।अब रोटी ऐसी बस्तु भी... Hindi · लेख 2 230 Share मनोज शर्मा 24 Sep 2020 · 1 min read दोस्ती कभी-कभी ख़्याल आता है कि ज़िन्दगी इतनी छोटी कैसे हो सकती है ये इल्म कुछ वर्ष पहले ही हुआ जब किताबों से मित्रता हुई।हर तरफ बस किताबों के अंदर की... Hindi · लेख 3 296 Share मनोज शर्मा 24 Sep 2020 · 1 min read चांद आज फिर चांद बदल गया अभी शाम ही को देखा था धूल से भरा मटमैला रेंगता मेरे घर की ओर लगा यूं कि बड़ा खिन्न था बदरंग सा दिशाहीन हो... Hindi · कविता 2 421 Share मनोज शर्मा 23 Sep 2020 · 1 min read बारिश एल ई डी लाइट्स की सफेद रोशनी बारिश की बूंदों को और दुधिया कर देती है जैसे अंधकार में टिमटिमाते छोटे जुगनु अपने अल्प समाज को चमकीला कर देते हैं।शाम... Hindi · लेख 1 1 197 Share मनोज शर्मा 23 Sep 2020 · 1 min read शाम ज़िन्दगी जैसे थम गयी है घर के एक कोने में वहीं सुबह जगती है शाम तक आंखे जैसे दीवारें ताकती है।अजीब-सी व्यस्तता जो निरंतर कहीं मुझमें समाती जा रही है।सुबह-शाम... Hindi · लेख 2 284 Share मनोज शर्मा 23 Sep 2020 · 4 min read कोरोना!एक वैश्विक आपदा कोविड-19 एक वैश्विक आपदा है जिसने संपूर्ण विश्व के लोगों को घरों में बंद कर दिया है।सारा मीडिया जगत ही नहीं बल्कि हर ज़ुबां पर एक ही नाम है कोरोना।कोरोना... Hindi · लेख 3 259 Share मनोज शर्मा 22 Sep 2020 · 2 min read शीरो अधखुले दरवाजे के पूरे पाट खुलते ही वो सड़क की ओर दौड़ पड़ा और खुले आकाश को देखने लगा जहां बादल दायें से बायें तीव्रता से एक दूसरे को रोंदते... Hindi · कहानी 1 1 459 Share मनोज शर्मा 22 Sep 2020 · 1 min read मौसम मौसम की भांति जीवन विविधताओं से परिपूर्ण है घर की डयोढ़ी रोज़ भीग जाती है सुबह की मंद मंद बूदों से पर कुछ देर में स्वच्छ दिखने लगती है उसी... Hindi · लेख 1 515 Share मनोज शर्मा 21 Sep 2020 · 1 min read पथ तुम आते कितनी बार रोज़ बस यौंही लौट जाते हो मेरा परिचय इतिहास नहीं आज भी तुम संग है पूर्ववत मेरे शून्य मंदिर में आज भी तुम गूंजते हो तुम्ही... Hindi · कविता 1 295 Share मनोज शर्मा 21 Sep 2020 · 2 min read मूल्यांकन पसंद चयन और वरीयता तीन ऐसे शब्द है जो एक दूसरे से संबद्ध है प्राय हमें जो पसंद होता है उसे चयन करना अपना ध्येय मानते हैं पर जीवन में... Hindi · लेख 1 2 428 Share मनोज शर्मा 21 Sep 2020 · 1 min read सुई दिन बदल गये जीवन नहीं बदला आज भी वही सुई है जो कल थी पर आज उसकी महत्ता बदल गई आज घर के सिले कपड़े कौन पहनता है आधुनिक सभ्य... Hindi · कविता 1 430 Share मनोज शर्मा 20 Sep 2020 · 1 min read शब्द कितने ही निरर्थक शब्द जीवन शैली में अभिन्न रूप से जुड़ने लगते हैं कुछ और कब पता ही नहीं चलता।ऐसे बेअदबी शब्द जिनके कोई मायने नहीं होते फिर भी सुनकर... Hindi · लेख 2 604 Share मनोज शर्मा 20 Sep 2020 · 1 min read स्टेटस तुम मुझे उतना ही जानते है जितना मैं तुम्हें शायद उसी तरह जैसे तुम मेरे रोज़ के स्टेट्स को पढ़ लेते हो और चूंकि मेरा परिचय अब आपके मोबाइल में... Hindi · लेख 1 237 Share मनोज शर्मा 20 Sep 2020 · 1 min read मोहन राकेश की डायरी से हवा में वासंती स्पर्श है-समय अच्छा-अच्छा लगता है।ऐसे में अनायास मन होता है कि हल्के-हल्के स्वर में किसी से बात करें।अपने चारों ओर घर की मिठास,घर की उष्णता हो।किसी के... Hindi · लेख 1 231 Share मनोज शर्मा 20 Sep 2020 · 1 min read उर्दू की मिठास कितने मुख्तलिफ़ चेहरों से ग़ुफ़्तगू होती है कुछ दिले ख़ास होते हैं तो कुछ निहायत बद दिमाग।उर्दू ज़ुबान में 'बा'और 'बे' का यकीनन् बेहतरीन प्रयोग है।जैसे बाअदब मतलब अच्छे से... Hindi · लेख 2 258 Share मनोज शर्मा 20 Sep 2020 · 1 min read Wish Ohh my sweetest wish Come fast Come fast Please hold me tight In your Lovely hand My eyes always Looks your path My lips Always follow Your words I search... Hindi · कविता 1 546 Share मनोज शर्मा 20 Sep 2020 · 1 min read वक़्त वक्त साथ है अभिव्यक्त नहीं होता कभी योंही तुम साथ रहो पूर्ववत लगता है तुम हो तुम ही हो पर साथ क्यों नहीं होते तुम कभी कभी साथ थे पहले... Hindi · कविता 1 511 Share मनोज शर्मा 20 Sep 2020 · 1 min read सबेरे सबेरे डेढ़ महीने से कमरों में था घर के अहाते या ड्योढ़ी तक चलना निकलना बस इतना ही या एक आध बार अत्यधिक ज़रूरी काज से घर के आसपास तक ही... Hindi · लेख 1 323 Share Previous Page 2 Next