■वंदन-गीत-

■वंदन-गीत-
#अपना_राजस्थान_है।।
【प्रणय प्रभात】
वीर प्रसूता माटी जिसकी,
स्वाभिमान परिपाटी जिसकी।
भारत का अभिमान है,
रंग-रंगीला, छैल-छबीला अपना राजस्थान है।।
● पाग केसरी, भगवा बाने,
पतझड़ में, मधुमासों में।
मान-मनौती मनुहारें सब,
कृत्यों में, विश्वासों में।
हर-हर महादेव के नारे,
रचे-बसे हैं श्वासों में।
परंपरा बलिदानों वाली,
भरी पड़ी इतिहासों में।
शीश झुकाना नहीं कटाना,
जहाँ सभी का मान है।
रंग-रंगीला, छैल-छबीला अपना राजस्थान है।।
● चटक रंग, बूटों संग बेलें,
मनभावन परिधानों में,
नित्य तीज-त्यौहार सुरंगे,
पाए हैं वरदानों में।
देवतुल्य हैं अतिथि जहाँ पर,
समरस तानों-बानों में।
देशभक्ति है भरी कूट कर,
जहाँ अन्न के दानों में।
स्वाभिमान नर-नारी बच्चों
वृद्धों तक की आन है।
रंग-रंगीला, छैल-छबीला अपना राजस्थान है।।
● राग-रागिनी, लय, सुर-ताले,
गूँजें जहाँ हवाओं में।
मस्ती, चंचलता, अल्हड़पन,
मिलता है ललनाओं में।
सिंह-गर्जना कंठ-कंठ में,
दमखम भरा भुजाओं में,
जिसकी तलवारी हुंकारें,
अब तक दसों दिशाओं में।
हाथी, घोड़े, ऊँट, सुसज्जित,
सदियों की पहचान है।
रंग-रंगीला, छैल-छबीला अपना राजस्थान है।।
● हिय में जितना प्रेम उमड़ता,
सब ला चरणों में धर दूँ,
जनम-जनम तक इसी धरा की,
गोदी में अपना सर दूँ।
सातों सागर करूँ सियाही,
धरती को कागज़ कर दूँ,
अलंकार, उपमाएं सारी,
शब्दों-अर्थों में भर दूँ।
स्तुति पूर्ण न होगी जिसकी,
भामाशाही शान है।
रंग-रंगीला, छैल-छबीला अपना राजस्थान है।।
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-सम्पादक-
न्यूज़&व्यूज (मप्र)