जितनी सुविधाएं मिली उतने ही हम दूर हो गए हैं

जितनी सुविधाएं मिली उतने ही हम दूर हो गए हैं
हालातों के आगे ना जाने कितने मजबूर हो गए हैं
ना किसी से बात करने का मन होता है ना किसी से मिलने का मन होता है
ना जाने कैसे इतने मगरुर हो गए हैं।
जितनी सुविधाएं मिली उतने ही हम दूर हो गए हैं
हालातों के आगे ना जाने कितने मजबूर हो गए हैं
ना किसी से बात करने का मन होता है ना किसी से मिलने का मन होता है
ना जाने कैसे इतने मगरुर हो गए हैं।