गर्द अपनी ये ख़ुद से हटा आइने।
*प्रेम क्या क्यों और कैसे?*
ख़ुद में खोकर ख़ुद को पा लेने का नाम ही ज़िंदगी है
मुस्कुराए लड़खड़ाए जिंदगी,
अकेले तय होंगी मंजिले, मुसीबत में सब साथ छोड़ जाते हैं।
क्या कर लेगा कोई तुम्हारा....
एक सरल प्रेम की वो कहानी हो तुम– गीत
बहुत कुछ पढ़ लिया तो क्या ऋचाएं पढ़ के देखो।