Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Jan 2024 · 1 min read

हमनें अपना

बे’ यकीनी से टूट सकता था ।
हमनें अपना भरम नहीं खोया ।।
डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
3 Likes · 231 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all

You may also like these posts

25. जी पाता हूँ
25. जी पाता हूँ
Rajeev Dutta
* घर में खाना घर के भीतर,रहना अच्छा लगता है 【हिंदी गजल/ गीत
* घर में खाना घर के भीतर,रहना अच्छा लगता है 【हिंदी गजल/ गीत
Ravi Prakash
वास्तविकता
वास्तविकता
Shyam Sundar Subramanian
निर्भय होकर आगे बढ़ना।
निर्भय होकर आगे बढ़ना।
Acharya Shilak Ram
4731.*पूर्णिका*
4731.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आईना
आईना
Kanchan Advaita
नैसर्गिक जो भी रहे, कब खोजें सम्मान।
नैसर्गिक जो भी रहे, कब खोजें सम्मान।
संजय निराला
यूं तुम से कुछ कहना चाहता है कोई,
यूं तुम से कुछ कहना चाहता है कोई,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
हैप्पी फादर्स डे(हास्य व्यंग)
हैप्पी फादर्स डे(हास्य व्यंग)
goutam shaw
दिलाओ याद मत अब मुझको, गुजरा मेरा अतीत तुम
दिलाओ याद मत अब मुझको, गुजरा मेरा अतीत तुम
gurudeenverma198
*हर किसी के हाथ में अब आंच है*
*हर किसी के हाथ में अब आंच है*
sudhir kumar
लिखा जब दिल का मैंने...
लिखा जब दिल का मैंने...
Priya princess panwar
भजन , ( अरदास कोरोना के समय) (32)
भजन , ( अरदास कोरोना के समय) (32)
Mangu singh
यादें
यादें
Dinesh Kumar Gangwar
मुक्तक
मुक्तक
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
जाति
जाति
Adha Deshwal
संसार
संसार
Dr. Shakreen Sageer
साध्वी प्रमुखा-कनकप्रभा जी
साध्वी प्रमुखा-कनकप्रभा जी
Sudhir srivastava
हाय री गरीबी कैसी मेरा घर  टूटा है
हाय री गरीबी कैसी मेरा घर टूटा है
कृष्णकांत गुर्जर
अच्छी बात है
अच्छी बात है
Ashwani Kumar Jaiswal
और कितना दर्द दें
और कितना दर्द दें
हिमांशु Kulshrestha
यही तो मजा है
यही तो मजा है
Otteri Selvakumar
सच जानते हैं फिर भी अनजान बनते हैं
सच जानते हैं फिर भी अनजान बनते हैं
सोनम पुनीत दुबे "सौम्या"
दुनियां में सब नौकर हैं,
दुनियां में सब नौकर हैं,
Anamika Tiwari 'annpurna '
..
..
*प्रणय प्रभात*
" मुस्कुराहट "
Dr. Kishan tandon kranti
हंसी आयी है लबों पर।
हंसी आयी है लबों पर।
Taj Mohammad
- तुम्हारी व्याख्या -
- तुम्हारी व्याख्या -
bharat gehlot
जीवन एक पुस्तक की तरह है अगले पन्ने पर क्या होगा, यह हमें पत
जीवन एक पुस्तक की तरह है अगले पन्ने पर क्या होगा, यह हमें पत
ललकार भारद्वाज
ग़ज़ल
ग़ज़ल
आर.एस. 'प्रीतम'
Loading...