Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Jul 2021 · 2 min read

जब मेले ने देखा चुड़ियों से मिल “इश्क का रंग”

क्यूँ ले लिया उनका सामान ?

अच्छ एक बात बताओ दीदी !

क्या ?
आपने ऐसा मरद देखा है जो अपनी बीबी को चुड़ियाँ चुराकर दे दे
चुप क्यूँ हो…बोलो न दीदी!

एक पल के लिये सांस लेती मैं पत्थर की हो गई,
शायद…मेरे लिये निःशब्द का मतलब यही रहा है
“ठहर जाना”
कदम चल रहे हों फिर भी अहसास के छुते लम्हों में
बस ठहर जाना,
क्या कहती मैं उससे

इंसान तो छोड़ो उस जमाने की फिल्मों में भी नहीं देखा जब एक रोटी की चोरी पूरी फिल्म की कहानी लिख देती थी।

मीनाबाजार में सजे उस खुबसूरत चुड़ियों की दुकान पर चुड़ियों को देखते-देखते ये क्या आ गया था सामने..?

दुकान की शुरुआत में खड़ा लड़का दौड़कर अंदर की तरफ आता है और चुड़ियों को देख रहे एक आदमी से उसका सामान ले लेता है,
“काफी गुस्से में…..मेरी चुड़ियाँ वापस करो तभी सामान दूँगा”

सामान के नाम पर एक लाल पलास्टिक बैग एक सफेद सर्ट और धोती में 60के आसपास का इंसान
“नहीं हमने नहीं लिया कहता हुआ”

दुकान में चार पाँच लोग सभी 18से 25/26 के बीच के…
जिसने चुड़ी लेते देखा था वो बहुत गुस्से में था,
फिर भी उसे इंसान की उम्र का लेहाज़ था शायद, वो गुस्से में ही लेकिन तमीज़ से चुड़ियाँ वापस करने को कह रहा था…दुकानदार ने वो लाल पलास्टिक बैग वहीं सामने चुड़ियों की सेल्फ के नीचे रख दिया…ताकि सबको दिखता रहे…एक एक कर के सबने पलास्टिक बैग चेक किया हाँ मगर तमीज़ से,

गुस्से में क्या होता है…किसी का भी सामान हो…हम उसे उलट पुलट कर उसका सामान बिखेर देते हैं पर यहाँ भी…क्या कहुँ…शायद संवेदना और जिम्मेदारी के बीच बैलेंस करने की कोशिश कर रहे थे लड़के हाँ लड़के…☀️
……….?

आपने सच में देखा ?
क्या दीदी आप भी; आपको यकीन नहीं हो रहा, अरे चुड़ियाँ उठाकर उन्होंने अपनी मेहरारू को दे दिया, हम बस उनका चेहरा नहीं देख पाये; अब इतनी भीड़ है; 250सौ की चुड़ियाँ थीं।
………?
चुड़ियाँ किसे पसंद नहीं होती…
अतिमध्यमवर्गीय या मध्यमवर्गीय परिवार में आज भी तीज़ त्योहार या खास मौके पर ही 50से ऊपर चुड़ियों का बजट होता है…सच है ये
उस लड़के की बात हमेशा गुंजती है मेरे आसपास,
वो क्या है न जिस क्षण पर ठहर गई वो हमेशा मेरे पास रहती है…..ना वो जाती है….ना मैं उसे जाने देती हुँ।

बात है उन चुड़ियों की
तो उस बड़ी सी दुकान की हजारों चुड़ियों में आखिर क्या किस्मत रही होगी उन चुड़ियाँ की…जिसे अपनी पत्नी के लिये चूराने की हिम्मत कर बैठा कोई…वो भी जिंदगी के उस मोड़ पर…

जाहिर है सिर्फ रिस्ता तो वजह नहीं रहा होगा…यहाँ
…..?
इस मेले से इसबार की ईकलौती चीज जो मैंने ऊठाई या खुद ही चलकर आई थी मेरे पास…वो था वो क्षण
जिसमें बहुत कुछ था…बहुत कुछ और सबसे अजुबा,
अजुबा ही कहेंगे
वर्ना कहाँ शामिल होती है आम तो छोड़ो खास जिंदगी में भी… जमीन का सफर तय कर अपने आखिरी सफर में बस आसमान को छुता
ऐसा ईश्क का रंग ?

~ © दामिनी नारायण सिंह

2 Likes · 4 Comments · 341 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

कोई तंकीद कर नहीं पाते
कोई तंकीद कर नहीं पाते
Dr fauzia Naseem shad
24/243. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/243. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आंसू
आंसू
Shakuntla Shaku
*मनः संवाद----*
*मनः संवाद----*
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
..
..
*प्रणय प्रभात*
2. Love-Lorn
2. Love-Lorn
Ahtesham Ahmad
हार से डरता क्यों हैं।
हार से डरता क्यों हैं।
Yogi Yogendra Sharma : Motivational Speaker
*आई सदियों बाद है, राम-नाम की लूट (कुंडलिया)*
*आई सदियों बाद है, राम-नाम की लूट (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
नव बहूँ
नव बहूँ
Dr. Vaishali Verma
आज कल...…... एक सच
आज कल...…... एक सच
Neeraj Kumar Agarwal
हारे मत ना हौसलों,
हारे मत ना हौसलों,
जितेन्द्र गहलोत धुम्बड़िया
"आईना सा"
Dr. Kishan tandon kranti
यह मेरा राजस्थान(राजस्थान दिवस पर)
यह मेरा राजस्थान(राजस्थान दिवस पर)
gurudeenverma198
रमेशराज के दो लोकगीत –
रमेशराज के दो लोकगीत –
कवि रमेशराज
आत्मविश्वास से लबरेज व्यक्ति के लिए आकाश की ऊंचाई नापना भी उ
आत्मविश्वास से लबरेज व्यक्ति के लिए आकाश की ऊंचाई नापना भी उ
Paras Nath Jha
अंधभक्तों से थोड़ा बहुत तो सहानुभूति रखिए!
अंधभक्तों से थोड़ा बहुत तो सहानुभूति रखिए!
शेखर सिंह
हमनवा
हमनवा
Bodhisatva kastooriya
किसी को सच्चा प्यार करने में जो लोग अपना सारा जीवन लगा देते
किसी को सच्चा प्यार करने में जो लोग अपना सारा जीवन लगा देते
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
हर बात छुपाने की दिल से ही मिटा देंगे ....
हर बात छुपाने की दिल से ही मिटा देंगे ....
sushil yadav
आत्मा की गूंज
आत्मा की गूंज
Rambali Mishra
सूरज मुझे जगाता, चांद मुझे सुलाता
सूरज मुझे जगाता, चांद मुझे सुलाता
Sarla Mehta
भरोसा
भरोसा
Mansi Kadam
ग़ज़ल(नाम तेरा रेत पर लिखते लिखाते रह गये)
ग़ज़ल(नाम तेरा रेत पर लिखते लिखाते रह गये)
डॉक्टर रागिनी
प्रतीक्षा
प्रतीक्षा
Shyam Sundar Subramanian
दुश्मन
दुश्मन
Dr.Pratibha Prakash
पूरा जब वनवास हुआ तब, राम अयोध्या वापस आये
पूरा जब वनवास हुआ तब, राम अयोध्या वापस आये
Dr Archana Gupta
मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है
मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है
Rituraj shivem verma
पिता एक पृथक आंकलन
पिता एक पृथक आंकलन
Shekhar Deshmukh
कहां है
कहां है
विशाल शुक्ल
मैं उसकी निग़हबानी का ऐसा शिकार हूँ
मैं उसकी निग़हबानी का ऐसा शिकार हूँ
Shweta Soni
Loading...