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22 Mar 2025 04:37 PM
श्रीमान जी, जब सत्ता के माध्यम से न्यायाधीशों का चयन वकीलों के मध्य से हो रहा हो, तो उन्हें अपने पक्ष के लोग ही नियुक्त करने हैं, और इन्हें
अपनी नियुक्ति के बाद अपनी तिजोरी भरनी है ताकि उच्च पद पर प्रतिष्ठित हो सकें,यह क्रम चलना है, वो दिन गये जब देशभक्ति तथा उचित न्याय के लिए जान भी जोखिम में डाल देते थे!वह दौर भी और था और लोग भी निष्ठा वाले होते थे!हमें यह त्रासदी झेलनी ही पड़ेगी!
श्रीमान जयकिशन उनियाल जी,
जैसा कि आपने कहा कि यह त्रासदी हमें झेलनी पड़ेगी लेकिन महोदय त्रासदी की एक समय सीमा होती है और एक समय के बाद वह समाप्त हो जाता है और जब त्रासदी समाप्त न होने वाला हो या समाप्ति की कोई आस ना हो वैसे स्थिति में वह त्रासदी विनाश और सर्वनाश का एक ऐसी रूप धारण कर लेगी जिसमें हम आप और सभी लपेटे जाएंगे।
खैर जब न्यायपालिका ही भ्रष्ट हो तो उनसे न्याय की आशा और उम्मीद नहीं की जा सकती।
खैर मेरी तरफ से धिक्कार है न्यायपालिका के ऐसे सिस्टम को,