Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Comments (6)

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

अनुपम सृजन

हार्दिक आभार

18 Aug 2021 07:25 PM

करते करते खुद से मुलाक़ात, खुल गए आपके सारे ऐसे जज़्बात, जो खुद ही कह रहे सारे भावार्थ, सुंदर, सुसज्जित भावों से पंक्तियां इतनी हुई हैं चरितार्थ, कि यह रचना बन गई है लाज़वाब ! ऊपर से हृदय स्पर्शी की भी छोड़ गई है छाप ! सचमुच, बहुत ही बेजोड़ रचना बनाईं हैं आप ! आपको शुभकामना संग देता हूॅं बहुत धन्यवाद !!

बहुत आभार इस सुंदर अंदाज में उत्साहवर्धन करने के लिए।

अतिसुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति !
धन्यवाद !

बहुत आभार आपका।

Loading...