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24 Jun 2020 11:00 PM

खुद को ना ढुंढ पाए, पढ़ाते हैं ज़माने को, सुंदर व्यग्यं भी है उलाहना भी!

आपको सादर नमस्कार धन्यवाद

बहुत सुन्दर रचना

आपका हृदय से आभार नमस्कार

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