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सुंदर व्याख्यापूर्ण प्रस्तुति।

महोदय मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि प्रारब्ध और भाग्य एक ना होकर भिन्न हैंं। भाग्य एक भविष्य का अनुमान है जो कि एक काल्पनिक निष्कर्ष है।
जिसकी विश्वविश्वसनीयता प्रश्नवाचक है।
जबकि प्रारब्ध प्राणी मात्र का एक निर्धारित जीवन पथ है। जो उसके जीवन में उसके समस्त कार्यकलापों को नियंत्रित करता है। और समय-समय पर उसके प्रभाव से अवगत कराता रहता है। यह सत्य है कि मनुष्य का धर्म कर्म करना है परंतु उसकै फल का निर्धारण प्रारब्ध के हाथों होता है। इसी कारण देखा गया है कि सतत लगन एवं निष्ठा से कर्म करने पर भी अपेक्षित उपलब्धि प्राप्त नहीं होती और कभी कभी अपेक्षा से अधिक उपलब्धि प्राप्त होती है। इसी प्रकार कभी-कभी अप्रत्याशित असफलताओं , कठिनाइयों और संकटों का सामना करना पड़ता है जिनके कारणों का ज्ञान मनुष्य की प्रज्ञा शक्ति से परे होता है। इसी प्रकार कभी-कभी मनुष्य खतरों से किसी दैवीय शक्ति के प्रभाव से बच निकलता है। इसी प्रकार मनुष्य पर किसी दैवीय कृपा दृष्टि की अविश्वसनीय बरसात होती है । यह सब उसके पूर्व निर्धारित प्रारब्ध की देन है। जो समयानुसार मनुष्य जीवन को प्रभावित करती रहती है। प्रारब्ध का पूर्वानुमान नहीं किया जा सकता यह समयानुसार मनुष्य जीवन को प्रभावित करता है। कुछ लोगों का कथन है कि प्रारब्ध पूर्व जन्म में किए कर्मों का प्रताप है जो इस जन्म में मनुष्य को भोगना पड़ता है। परंतु इस कथन में विश्वसनीयता का अभाव है।

धन्यवाद !

12 Jun 2020 06:13 AM

विश्लेषणात्मक सुझाव हेतु आभार
धन्यवाद महोदय

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