Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Feb 2023 · 1 min read

Kagaj ke chand tukado ko , maine apna alfaj bana liya .

Kagaj ke chand tukado ko , maine apna alfaj bana liya .
Taumar tujhme basne ko , maine apna khab bna liya .
Tere ashko me dhumil ho jau mai kahi,
Tere saso ki sargam ko maine apna tal bana liya . 😍
By sakshi

92 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
दोहा
दोहा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
मेरी माँ
मेरी माँ
Pooja Singh
मुझे भुला दो बेशक लेकिन,मैं  तो भूल  न  पाऊंगा।
मुझे भुला दो बेशक लेकिन,मैं तो भूल न पाऊंगा।
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
' समय का महत्व '
' समय का महत्व '
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
... और मैं भाग गया
... और मैं भाग गया
नन्दलाल सिंह 'कांतिपति'
अभागा
अभागा
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
उसकी बेहिसाब नेमतों का कोई हिसाब नहीं
उसकी बेहिसाब नेमतों का कोई हिसाब नहीं
shabina. Naaz
चेहरा और वक्त
चेहरा और वक्त
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
इतिहास और साहित्य
इतिहास और साहित्य
Buddha Prakash
खत लिखा था पहली बार दे ना पाए कभी
खत लिखा था पहली बार दे ना पाए कभी
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
वीर हनुमान
वीर हनुमान
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मैं और मेरा यार
मैं और मेरा यार
Radha jha
ख़ामोश निगाहें
ख़ामोश निगाहें
Surinder blackpen
अपने हाथ,
अपने हाथ,
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
वक्त का इंतजार करो मेरे भाई
वक्त का इंतजार करो मेरे भाई
Yash mehra
सृजन
सृजन
Prakash Chandra
दूर तक आ गए मुश्किल लग रही है वापसी
दूर तक आ गए मुश्किल लग रही है वापसी
गुप्तरत्न
*निर्धनता ( कुंडलिया )*
*निर्धनता ( कुंडलिया )*
Ravi Prakash
बहुजन विमर्श
बहुजन विमर्श
Shekhar Chandra Mitra
मृदुलता ,शालीनता ,शिष्टाचार और लोगों के हमदर्द बनकर हम सम्पू
मृदुलता ,शालीनता ,शिष्टाचार और लोगों के हमदर्द बनकर हम सम्पू
DrLakshman Jha Parimal
उम्मीद
उम्मीद
Dr. Rajiv
"ଜୀବନ ସାର୍ଥକ କରିବା ପାଇଁ ସ୍ୱାଭାବିକ ହାର୍ଦିକ ସଂଘର୍ଷ ଅନିବାର୍ଯ।"
Sidhartha Mishra
अफसोस-कविता
अफसोस-कविता
Shyam Pandey
श्री विध्नेश्वर
श्री विध्नेश्वर
Shashi kala vyas
पारख पूर्ण प्रणेता
पारख पूर्ण प्रणेता
प्रेमदास वसु सुरेखा
खुशी के माहौल में दिल उदास क्यों है,
खुशी के माहौल में दिल उदास क्यों है,
कवि दीपक बवेजा
जिंदगी का सफर बिन तुम्हारे कैसे कटे
जिंदगी का सफर बिन तुम्हारे कैसे कटे
VINOD KUMAR CHAUHAN
😊चुनावी साल😊
😊चुनावी साल😊
*Author प्रणय प्रभात*
कोई ज्यादा पीड़ित है तो कोई थोड़ा
कोई ज्यादा पीड़ित है तो कोई थोड़ा
Pt. Brajesh Kumar Nayak
"टिकमार्क"
Dr. Kishan tandon kranti
Loading...