Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Jun 2023 · 1 min read

Happy Father Day, Miss you Papa

#पापा जब रोज सुबह उठते थे, तो हमे उनके बिस्तर मे घुस कर सो जाने मे बड़ा आनंद आता था। लेकिन आज वो हमेशा के लिए सो गये, बिना बिस्तर के न जाने कंहा होगे, क्योंकि उनका बिस्तर आज भी यंही पड़ा है । सूना उन बिन…….

1 Like · 445 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from संजय कुमार संजू
View all
You may also like:
बिन बोले सुन पाता कौन?
बिन बोले सुन पाता कौन?
AJAY AMITABH SUMAN
माँ की दुआ
माँ की दुआ
Anil chobisa
ख्वाहिश
ख्वाहिश
Neelam Sharma
ओ चाँद गगन के....
ओ चाँद गगन के....
डॉ.सीमा अग्रवाल
लिखू आ लोक सँ जुड़ब सीखू, परंच याद रहय कखनो किनको आहत नहिं कर
लिखू आ लोक सँ जुड़ब सीखू, परंच याद रहय कखनो किनको आहत नहिं कर
DrLakshman Jha Parimal
दोस्ती का रिश्ता
दोस्ती का रिश्ता
विजय कुमार अग्रवाल
कड़वी  बोली बोल के
कड़वी बोली बोल के
Paras Nath Jha
अखंड भारत कब तक?
अखंड भारत कब तक?
जय लगन कुमार हैप्पी
ख़ुदा बताया करती थी
ख़ुदा बताया करती थी
Madhuyanka Raj
अपनी इबादत पर गुरूर मत करना.......
अपनी इबादत पर गुरूर मत करना.......
shabina. Naaz
लाईक और कॉमेंट्स
लाईक और कॉमेंट्स
Dr. Pradeep Kumar Sharma
इसमें हमारा जाता भी क्या है
इसमें हमारा जाता भी क्या है
gurudeenverma198
LALSA
LALSA
Raju Gajbhiye
अगहन माह के प्रत्येक गुरुवार का विशेष महत्व है। इस साल 30  न
अगहन माह के प्रत्येक गुरुवार का विशेष महत्व है। इस साल 30 न
Shashi kala vyas
नन्हीं परी आई है
नन्हीं परी आई है
Mukesh Kumar Sonkar
कौन याद दिलाएगा शक्ति
कौन याद दिलाएगा शक्ति
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
द्वारिका गमन
द्वारिका गमन
Rekha Drolia
तेरा फिक्र
तेरा फिक्र
Basant Bhagawan Roy
बुंदेली साहित्य- राना लिधौरी के दोहे
बुंदेली साहित्य- राना लिधौरी के दोहे
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
जननी-अपना देश (कुंडलिया)
जननी-अपना देश (कुंडलिया)
Ravi Prakash
कोशिश करना आगे बढ़ना
कोशिश करना आगे बढ़ना
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
हिरनगांव की रियासत
हिरनगांव की रियासत
Prashant Tiwari
पूरा दिन जद्दोजहद में गुजार देता हूं मैं
पूरा दिन जद्दोजहद में गुजार देता हूं मैं
शिव प्रताप लोधी
3264.*पूर्णिका*
3264.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
ठंड से काँपते ठिठुरते हुए
ठंड से काँपते ठिठुरते हुए
Shweta Soni
वक्ता का है तकाजा जरा तुम सुनो।
वक्ता का है तकाजा जरा तुम सुनो।
कुंवर तुफान सिंह निकुम्भ
जुनून
जुनून
नवीन जोशी 'नवल'
*खादिम*
*खादिम*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
असली परवाह
असली परवाह
*Author प्रणय प्रभात*
क्रोध
क्रोध
Mangilal 713
Loading...