Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Mar 2024 · 1 min read

3072.*पूर्णिका*

3072.*पूर्णिका*
🌷 वक्त जाया ना कीजिए🌷
22 22 2212
यूं वक्त जाया ना कीजिए ।
कुछ पछतावा ना कीजिए ।।
दुनिया का ठेका कौन ले।
आस लगाया ना कीजिए ।।
हरदम चलते दामन पकड़ ।
मन फैलाया ना कीजिए ।।
देखो समझो मौका मिला।
लाभ उठाया ना कीजिए ।।
रखते भी खेदू शर्त नहीं ।
रोज सताया ना कीजिए ।।
………..✍ डॉ .खेदू भारती”सत्येश”
04-03-2024सोमवार

1 Like · 45 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जय भोलेनाथ ।
जय भोलेनाथ ।
Anil Mishra Prahari
"" *सिमरन* ""
सुनीलानंद महंत
जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है। न सुख, न दुःख,न नौकरी, न रिश
जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है। न सुख, न दुःख,न नौकरी, न रिश
पूर्वार्थ
*सपने कुछ देखो बड़े, मारो उच्च छलॉंग (कुंडलिया)*
*सपने कुछ देखो बड़े, मारो उच्च छलॉंग (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
प्लास्टिक की गुड़िया!
प्लास्टिक की गुड़िया!
कविता झा ‘गीत’
👌परिभाषा👌
👌परिभाषा👌
*Author प्रणय प्रभात*
मजदूर की बरसात
मजदूर की बरसात
goutam shaw
"नजरों से न गिरना"
Dr. Kishan tandon kranti
मेरा प्यारा राज्य...... उत्तर प्रदेश
मेरा प्यारा राज्य...... उत्तर प्रदेश
Neeraj Agarwal
कोशी के वटवृक्ष
कोशी के वटवृक्ष
Shashi Dhar Kumar
नीर क्षीर विभेद का विवेक
नीर क्षीर विभेद का विवेक
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
यदि हर कोई आपसे खुश है,
यदि हर कोई आपसे खुश है,
नेताम आर सी
यशोधरा के प्रश्न गौतम बुद्ध से
यशोधरा के प्रश्न गौतम बुद्ध से
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
नमन सभी शिक्षकों को, शिक्षक दिवस की बधाई 🎉
नमन सभी शिक्षकों को, शिक्षक दिवस की बधाई 🎉
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
It is necessary to explore to learn from experience😍
It is necessary to explore to learn from experience😍
Sakshi Tripathi
पिछले पन्ने भाग 2
पिछले पन्ने भाग 2
Paras Nath Jha
वह बचपन के दिन
वह बचपन के दिन
Yogi Yogendra Sharma : Motivational Speaker
कितना खाली खालीपन है !
कितना खाली खालीपन है !
Saraswati Bajpai
2817. *पूर्णिका*
2817. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
धूप निकले तो मुसाफिर को छांव की जरूरत होती है
धूप निकले तो मुसाफिर को छांव की जरूरत होती है
कवि दीपक बवेजा
बावला
बावला
Ajay Mishra
राह दिखा दो मेरे भगवन
राह दिखा दो मेरे भगवन
Buddha Prakash
पर्यावरण
पर्यावरण
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਗਲਿਆਰੇ
ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਗਲਿਆਰੇ
Surinder blackpen
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
* सखी  जरा बात  सुन  लो *
* सखी जरा बात सुन लो *
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
देखता हूँ बार बार घड़ी की तरफ
देखता हूँ बार बार घड़ी की तरफ
gurudeenverma198
स्वयंसिद्धा
स्वयंसिद्धा
ऋचा पाठक पंत
हम कोई भी कार्य करें
हम कोई भी कार्य करें
Swami Ganganiya
धुँधलाती इक साँझ को, उड़ा परिन्दा ,हाय !
धुँधलाती इक साँझ को, उड़ा परिन्दा ,हाय !
Pakhi Jain
Loading...