Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Jul 2023 · 3 min read

सीनाजोरी (व्यंग्य)

व्यंग्य

सीनाजोरी

“रामलाल, यू आर अंडर अरेस्ट। देखो, पुलिस ने तुम्हारे घर को चारों तरफ से घेर लिया है। तुम भागने की कोशिश मत करना, वरना मैं गोली मार दूँगा।” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह दहाड़ते हुए बोले।
“सलाम साहब। लगता है आपको कुछ गलतफहमी हो गई है। आप मुझे यूँ गिरफ्तार नहीं कर सकते।” उसने अनुनय-विनय के स्वर में बोला।
“अच्छा, तो अब तुम मुझे बताओगे, कि मैं तुम्हें कैसे गिरफ्तार करूँ ?” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह फिर से गरजे।
“देखिए साहब, मैंने कहा न कि आप मुझे गिरफ्तार नहीं कर सकते ?” वह शांत भाव से बोला।
“क्यों ? क्यों गिरफ्तार नहीं कर सकते ? गिरफ्तारी वारंट है हमारे पास। सबूत भी। जिस घर में तुमने चोरी और दो-दो मर्डर की है, वहाँ की सी.सी. टी.वी. कैमरा की रिकार्डिंग में तुम स्पष्ट रूप से दिख रहे हो। फिंगर प्रिंट भी मैच कर रहा है।” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह अपने चिर परिचित अंदाज में बोले।
“मैं नहीं मानता ये सब फालतू की बातों को। आप लोग बेवजह मेरे ही पीछे क्यों पड़े हैं।” उसका स्वर थोड़ा बदला सा लगा।
“बेवजह ? देखो, हम अभी मजाक के मूड में बिल्कुल भी नहीं हैं। पहले ही कहे देते हैं।” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह बोले।
“तो मैं कौन-सा मजाक के मूड में हूँ इंस्पेक्टर साहेब। आप लोग काहे मेरे गले पड़ रहे हैं। जाइए, अपने रास्ते। अपना काम धंधा देखिए और प्लीज, मुझे बख्श दीजिए।” वह निर्भीक स्वर में बोला।
“ऐ, ज्यादा साड़े नइ बनने का। चुपचाप चलता है हमारे साथ या लगाऊ दो डंडा पिछवाड़े में।” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह धमकाते हुए बोले।
“देखिए साहब, आप मुझे मेरे ही घर में यूँ जलील नहीं कर सकते। आप मेरे घर में हैं, इसलिए लिहाज कर रहा हूँ, वरना… ” वह खीझते हुए बोला।
“वरना क्या बे…. क्या उखाड़ लेगा तू…?” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह उसकी कालर पकड़ कर धमकाते हुए बोले।
“देखो इंस्पेक्टर साहब, अब बहुत हो गया आप लोगों का नाटक। मैंने आपकी बहुत-सी बदतमीजियां सह ली। यहाँ हमें मेरे घरवाले ही नहीं, आते-जाते लोग भी देख रहे हैं।” इस बार वह नाराजगी भरे स्वर में बोला।
“वही तो, संभल जाओ और चुपचाप चलो यहाँ से, ठीक वैसे, जैसे कि हर बार चलते हो।” इंस्पेक्टर बोले।
“हर बार, क्या मतलब है आपका ?” उसने पूछा।
“अबे साले, अभी पिछले महीने ही तुम्हें मैं यहीं से गिरफ़्तार करके थाने ले गया था । भूल गया सब कुछ इतनी जल्दी ।” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह बोले।
“देखो साहब, इन सब पुरानी बातों को याद करने का कोई लाभ नहीं।” उसने सपाट स्वर में कहा।
“क्या मतलब है तुम्हारा ?” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह ने आश्चर्य से पूछा।
“छोडिये साहब, आप नहीं समझेंगे ये सब। फिर भी मैं आपसे एक बात जानना चाहता हूँ कि क्या आप लोगों के पास मेरा गिरफ्तारी वारंट है ?” उसने पूछा।
“हाँ…हाँ, क्यों नहीं। हम पुलिस वाले कभी कोई कच्चा काम नहीं करते हैं। ये देखो तुम्हारे नाम का गिरफ्तारी वारंट।” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह ने गिरफ्तारी वारंट दिखाते हुए कहा।
“पर ये तो किसी रामलाल के नाम पर है, जबकि मैं रामलाल नहीं कन्हैया लाल हूँ। रामलाल के नाम की ऑर्डर पर आप कन्हैया लाल को गिरफ्तार नहीं कर सकते।” वह बोला।
“क्या मतलब है तुम्हारा ? तुम रामलाल से कन्हैयालाल कैसे हो सकते हो ? पिछले तीन साल में मैं तुम्हें सात बार गिरफ्तार कर चुका हूँ और अब कह रहे हो कि तुम रामलाल नहीं कन्हैयालाल हो।” इंस्पेक्टर झपट्टा सिंह ने आश्चर्य से पूछा।
“मैं सही कह रहा हूँ साहब। ये देखिये मेरा सर्टिफिकेट, अब मेरा नाम रामलाल नहीं कन्हैयालाल है और मैंने सारे बुरे काम छोड़ दिए हैं। अब मैं भी आप लोगों की तरह शराफत की जिन्दगी जीना चाहता हूँ। जाइए, आप अपना काम कीजिए और मुझे शराफत की जिन्दगी जीने दीजिए।” उसने बताया।
अब पुलिस उलटे पाँव लौटने लगी।
– डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़

164 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
वर्तमान से ज्यादा
वर्तमान से ज्यादा
पूर्वार्थ
क्यों बदल जाते हैं लोग
क्यों बदल जाते हैं लोग
VINOD CHAUHAN
जीवन की विफलता
जीवन की विफलता
Dr fauzia Naseem shad
कड़वा सच
कड़वा सच
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
चैन अमन
चैन अमन
भगवती पारीक 'मनु'
मेरे बस्ती के दीवारों पर
मेरे बस्ती के दीवारों पर
'अशांत' शेखर
हिंदी साहित्य की नई : सजल
हिंदी साहित्य की नई : सजल
Sushila joshi
दोस्तों !
दोस्तों !
Raju Gajbhiye
*कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है (गीत)*
*कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है (गीत)*
Ravi Prakash
काजल में उसकी काली रातें छुपी हैं,
काजल में उसकी काली रातें छुपी हैं,
Kanchan Alok Malu
*Love filters down the soul*
*Love filters down the soul*
Poonam Matia
वीणा-पाणि वंदना
वीणा-पाणि वंदना
राधेश्याम "रागी"
क्यूट हो सुंदर हो प्यारी सी लगती
क्यूट हो सुंदर हो प्यारी सी लगती
Jitendra Chhonkar
उस दर पर कोई नई सी दस्तक हो मेरी,
उस दर पर कोई नई सी दस्तक हो मेरी,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
आटा
आटा
संजय कुमार संजू
Memories
Memories
Sampada
"दिमागी गुलामी"
Dr. Kishan tandon kranti
इसकी वजह हो तुम, खता मेरी नहीं
इसकी वजह हो तुम, खता मेरी नहीं
gurudeenverma198
मत रो मां
मत रो मां
Shekhar Chandra Mitra
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बहके जो कोई तो संभाल लेना
बहके जो कोई तो संभाल लेना
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
मुग़ल काल में सनातन संस्कृति,मिटाने का प्रयास हुआ
मुग़ल काल में सनातन संस्कृति,मिटाने का प्रयास हुआ
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
हम कितने आजाद
हम कितने आजाद
लक्ष्मी सिंह
बस में भीड़ भरे या भेड़। ड्राइवर को क्या फ़र्क़ पड़ता है। उसकी अप
बस में भीड़ भरे या भेड़। ड्राइवर को क्या फ़र्क़ पड़ता है। उसकी अप
*प्रणय*
कुछ लिखूँ ....!!!
कुछ लिखूँ ....!!!
Kanchan Khanna
3756.💐 *पूर्णिका* 💐
3756.💐 *पूर्णिका* 💐
Dr.Khedu Bharti
वहम और अहम में रहना दोनो ही किसी व्यक्ति के लिए घातक होता है
वहम और अहम में रहना दोनो ही किसी व्यक्ति के लिए घातक होता है
Rj Anand Prajapati
कहने को खामोश थी,
कहने को खामोश थी,
sushil sarna
Tum ibadat ka mauka to do,
Tum ibadat ka mauka to do,
Sakshi Tripathi
तकलीफ इस बात की नहीं है की हम मर जायेंगे तकलीफ इस बात है की
तकलीफ इस बात की नहीं है की हम मर जायेंगे तकलीफ इस बात है की
Ranjeet kumar patre
Loading...