Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Nov 2022 · 2 min read

पेंशन

*पेंशन *
” बताओ, पिता को कौन अपने साथ रखोगे , बड़े या छोटे?” जान से प्यारी माँ समान भाभी के तेरहवीं के बाद, मेहमान को विदा करते ही बुआ ने पहला सवाल बाउंसर की तरह कमरे में उछाला।

वहाँ मौजूद, दिवंगत माँ को याद कर रहे शोकाकुल बड़े और छोटे बेटे थे…साथ में दोंनो की पत्नियाँ , तथा एक विवाहिता बेटी अपने पति और नन्हे बेटे के साथ भी मौजूद थी। बेटी,जो बीमार माँ की सेवा के लिए एक महीना पहले ससुराल से आई थी,माँ की बहुत सेवा करती थी ।

अब सभी लोग नाक -भौ सिकुड़ कर, बुआ को ऐसे देखने लगे, जैसे बुआ ने कुछ गलत कह दिया।
घर में सभी बुआ का बहुत इज्जत करते धे और उनसे डरते भी… अब जवाब देने की बारी आई। सबसे पहले बड़की पतोहू ने कहा,” मैं बीमार रहती हूँ, मुझसे अकेले पिताजी का सेवा नहीं हो पाएगा।
नौकर रहेगा तभी संभव है। वह घर का सारा काम करेगा और पिताजी को भी देखेगा, पिताजी के पेंशन से उसे तनख्वाह दिया जाएगा। इसलिए पिताजी को सारा पेंशन मेरे हाथ में देना होगा,तभी मैं भार गछूँगी।

हाँ मे हाँ मिलाते हुए छोटकी पतोहू ने जोर से कहा ,” दीदी बिल्कुल ठीक कह रही है। पिताजी जिसके पास रहेंगे, सारा पेंशन उन्हें देना होगा। अम्मा जब स्वस्थ थी तो घर का सब काम करती थी। मुझे अधिक काम करने का आदत नहीं है।”

विधुर पिताजी बगल वाले कमरे से सब सुन रहे थे। लाठी ठकठकाते हुए नजदीक आकर बोले, “मैं तुम दोंनो के पास नही रहूँगा ।

ऐसा सुनकर सब अवाक रह गये, कमरे में खामोशी छा गयी।

आखिर, बड़े बेटे ने साहस करके पूछा, ” पिताजी, सत्तर बरिस के उमिर में आपको कहाँ रहने का इरादा है?”

“क्यों? मुझे भगवान ने तीन संतान दिये हैं। मैं बेटी रीना के पास रहूँगा। ”

“बेटी के घर मे?” छोटे बेटे ने पिता से सवाल किया।

“हाँ…..।” पिता ने लाठी पटकते हुए कहा।

” हमारे साथ क्यों नहीं?” दोंनो बेटे ने एक स्वर से पूछा।

“क्योंकि तुम दोंनो को मुझसे अधिक मेरे पेंशन से प्रेम है और रीना को सिर्फ मुझसे , इसलिए…! रीना, चलो यँहा से, अब मैं तुम्हारे साथ रहूँगा। ”

ऐसा ही हुआ, पिताजी अपना सामान लेकर बेटी,दामाद के साथ विदा हो गये।

पिताजी के जाते समय भी बेटे,बहू को अधिक दुख उनके पेंशन को लेकर ही था, जो अब उनलोगों के हाथ से फिसल चुका था!

मिन्नी मिश्रा, पटना (बिहार)
स्वरचित, मौलिक

Language: Hindi
96 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
दोस्तों अगर किसी का दर्द देखकर आपकी आत्मा तिलमिला रही है, तो
दोस्तों अगर किसी का दर्द देखकर आपकी आत्मा तिलमिला रही है, तो
Sunil Maheshwari
आँशुओ ने कहा अब इस तरह बहा जाय
आँशुओ ने कहा अब इस तरह बहा जाय
Rituraj shivem verma
फ़र्क़..
फ़र्क़..
Rekha Drolia
गुरु ही साक्षात ईश्वर
गुरु ही साक्षात ईश्वर
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
जय श्रीराम
जय श्रीराम
Pratibha Pandey
और मौन कहीं खो जाता है
और मौन कहीं खो जाता है
Atul "Krishn"
हिंदी भाषा नही,भावों की
हिंदी भाषा नही,भावों की
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
Friendship day
Friendship day
Neeraj kumar Soni
*कुल मिलाकर आदमी मजदूर है*
*कुल मिलाकर आदमी मजदूर है*
sudhir kumar
🫴झन जाबे🫴
🫴झन जाबे🫴
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
विश्व पर्यावरण दिवस
विश्व पर्यावरण दिवस
Surinder blackpen
छल करने की हुनर उनमें इस कदर थी ,
छल करने की हुनर उनमें इस कदर थी ,
Yogendra Chaturwedi
निर्धन की  यह झोपड़ी,
निर्धन की यह झोपड़ी,
sushil sarna
5. *संवेदनाएं*
5. *संवेदनाएं*
Dr .Shweta sood 'Madhu'
याद हम बनके
याद हम बनके
Dr fauzia Naseem shad
संकल्प
संकल्प
Bodhisatva kastooriya
बड़ा मन करऽता।
बड़ा मन करऽता।
जय लगन कुमार हैप्पी
कविता -
कविता - " रक्षाबंधन इसको कहता ज़माना है "
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
"" *माँ की ममता* ""
सुनीलानंद महंत
*सुकृति (बाल कविता)*
*सुकृति (बाल कविता)*
Ravi Prakash
4648.*पूर्णिका*
4648.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मर्द की मोहब्बत औरत को हमेशा जवान रखती है जबकि मर्द से मिली
मर्द की मोहब्बत औरत को हमेशा जवान रखती है जबकि मर्द से मिली
इशरत हिदायत ख़ान
सावन
सावन
Shriyansh Gupta
लोग आसमां की तरफ देखते हैं
लोग आसमां की तरफ देखते हैं
VINOD CHAUHAN
"खिलाफत"
Dr. Kishan tandon kranti
विश्व कप-2023 का सबसे लंबा छक्का किसने मारा?
विश्व कप-2023 का सबसे लंबा छक्का किसने मारा?
World Cup-2023 Top story (विश्वकप-2023, भारत)
शीतलहर
शीतलहर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
राहों से हम भटक गए हैं
राहों से हम भटक गए हैं
Suryakant Dwivedi
There will be moments in your life when people will ask you,
There will be moments in your life when people will ask you,
पूर्वार्थ
अब अपना पराया तेरा मेरा नहीं देखता
अब अपना पराया तेरा मेरा नहीं देखता
Abhinay Krishna Prajapati-.-(kavyash)
Loading...