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29 Jan 2017 · 1 min read

छू लेंगी आकाश,यही संकल्प हमारा।

गीत(रोला छ्न्द)
——-

बहुत लिया है काट,घुटन में जीवन सारा
छू लेंगी आकाश,यही संकल्प हमारा।

मानस रूपी बीज,धरा जो भी पाता है
उसी भूमि से रक्त,दिया तन को जाता है
ममता की दे छाँव,धूप से रखे बचाकर
सहकर सारा भार, मही हर सुख दे लाकर

पर तरुवर से मान,सदा धरती का हारा
छू लेंगी आकाश,यही संकल्प हमारा।

विश्व सरोवर आज ,शांत सा यूँ दिखता है
सँजो सभी संताप,हृदय ये ज्यों टिकता है
उठना है तूफ़ान,शान्ति अब तो भागेगी
भरकर अब हुंकार,नार हर इक जागेगी।

सभी दुखों से देख,करें हम आज किनारा
छू लेंगी आकाश ,यही संकल्प हमारा।

मन के पंछी खूब,उड़ेंगे पर फैलाकर
आसमान को माप,चलेंगे ऊपर जाकर
अपनी धरती और,हुआ ये अम्बर अपना
कर लेंगी साकार,रहा जो अपना सपना

दम से देंगी मोड़,रही बहती जो धारा
छू लेंगी आकाश,यही संकल्प हमारा।

अब होती है भोर,रात काली ये छँटती
हुआ सूर्य भी दीप्त,लालिमा आकर डटती
दिन की ये शुरुआत,घटा को दूर भगाए
अभी खुली सी राह, वही हमको दिखलाए

चुनतीं अपना आज,सफर हमको जो प्यारा
छू लेंगी आकाश,यही संकल्प हमारा।

©सतविन्द कुमार राणा
बाल राजपूतान,करनाल
हरियाणा,
मोबाइल-9255532842

Language: Hindi
Tag: गीत
428 Views
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