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23 Dec 2019 · 1 min read

चमकेगा सूरज पुन:

होती खंडित अनगिनत, ख्वाबों की बारात !
तब जा कर आता कहीं,अगला नवल प्रभात !!

भले ग्रहण है आज यह, कुछ पल ठहर रमेश ।
चमकेगा सूरज पुन:,…………देखेगा ये देश !!
रमेश शर्मा.

Language: Hindi
1 Like · 362 Views
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