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11 Dec 2023 · 1 min read

🫴झन जाबे🫴

🫴झन जाबे🫴
🌹
पइरी ल बजावत आबे
मन ल रिझा के झन जाबे।
किरिया हावय परेम के तोला
सुन्ना म मोला सोरियाबे।
🌹
मुंदरी दिही तोला ताना
कजरा घलो रोवाही ।
छतिया के धक-धकी हर
रात भर जगाही ।
🌹
अतंस के पीरा ल जान जाबे
मन ल रिझा के झन जाबे ।
🌹
अरहजही तोर चूरी,चूरी म
नथनी घलो पिराही ।
टिकली नई लगही माथ म
ऐना घलो नई भाही ।
🌹
संग म रहिबे सुख पाबे
मन ल रिझा के झन जाबे।
🌹
खोपा के गजरा अऊ अंचरा ह
उलझ ,सरक जाही ।
तन के पिंजरा तै बंधा के संगी
पांव तोर डगमगाही ।
🌹
मन ल रिसा के मोर जाबे
सुरता म तै अटियाबे।
🌹
करत अगोरा डेहरी म
संझा -बिहना पहाही ।
बसंत – बरखा अऊ तीज -तिहार
तोर बर रिसा जाही।
🌹
पगली कस अपने-अपन गीठियाबे
फेर इंद्रल तै नई पाबे
जउन तै मन ल रिझा के जाबे।

🔥सुरेश अजगल्ले”इंद्र”🔥
खरौद

Language: Chhattisgarhi
Tag: Poem
112 Views
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