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18 Nov 2023 · 1 min read

🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀

🥀 गुरु चरणों की धूल🥀
विधा-गीतिका* आधार छंद-लावणी(मापनीयुक्त मात्रिक)*विधान-३०मात्रा,१६-१४पर यति।**समान्त-आयेगा,अपदान्त।*
*******************
भाग्य का लेखा कौन पढ़ें तेरे,ज्योतिष बतायेगा।
माँ बाप गुरु राम जग्में अपने,कुकर्म ले धायेगा।
आत्मात्क पहुंच उसकी,गुरु आज्ञा मिलें उसको,
रज ये मस्तिष्क पे लगा कर,भव से पार वो हो जायेगा।
काम क्रोध मद लोभ जो त्पागे,वो धर्मी धर्म के पथ ध्याये,
हर्षाता उस मानव कीवन,जीते जी स्वर्ग में वह पायेगा।
मन भावना से परिपूर्ण हो,परमार्थी हो कीवन उसका,
आत्म साक्षात्कार की कामना हो,उसको ईश मिल जायेगा।
मुर्खाबिन्द से भजन राम का कर,मन से भावन राम मधुरव,
हर्षित हों हर मानव मनसें, ईश ऐसा सूर्य ध्यायेगा।।

✍जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी उ•प्र•*
शुभ सन्ध्या हो सबकी

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