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26 Oct 2023 · 1 min read

🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀

🥀 अज्ञानी की कलम🥀
मुक्तक
जलकुंभी सी फैल रही हैं-
मावनता अभिश्राप बने।
कुकर्मी कुधर्मी धूम रहे हैं-
पल पल ये आघात बने।।
रावण का पुतला यूं बोला-
जग न हमें जला पायेगा-
अंर्तआत्म जगा न सकोगे-
राम भक्ति के सुजान बने।।

जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
झाँसी

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