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15 Nov 2023 · 1 min read

🥀*अज्ञानी की कलम*🥀

🥀*अज्ञानी की कलम*🥀
सम मात्रिक छन्द रघुवर राम जय जय जी
सोल सोल बम सना, राम राम – बोलना।
मात पिता वान हो, ताप्त भाव ध्यान हो।
सत पथ जोड़ दे, मोह माया छोड़ दे।
धेह भी न आत है, राम नाम साथ है।
चूर अभिमान हो, पद -रज रूझान हो।
बड़े भाग्य नर तन मिले,बागों में ये सुमन खिले।
मूर्ख भ्रम में पड़ा, माल बर्टोने खड़ा।
हर्ष – मन ग्यर्थ है, राख मेह – सर्थ है।
राम ध्यान का धरो, सूक्ति – मन भान करो।
अज्ञानी ये मसार है, तार्क मंत्र सार है।।

जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
झाँसी उ•प्र•

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