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19 May 2023 · 4 min read

😊 #सुर्ख़ियों में आने का ज़ोरदार #तरीक़ा :–

😊 #फ़ोकट_के_टिप्स
■ सुर्ख़ियों में आने के नायाब नुस्खे
★ छुटभैया बिरादरी के लिए
【प्रणय प्रभात】
एक समय कविवर रहीम दास ने कभी कहा था कि-
“बड़े काम छोटे करें, तो न बढाई होय।
ज्यों रहीम हनुमंत को गिरधर कहे न कोय।।”
मतलब, लघुजनों के गुरुकर्म मदांध मानवीय समाज आसानी से मान्य नहीं करता। कालांतर यानि नए दौर में डॉ. बशीर “बद्र” को थोड़ा घुमा-फिरा कर कहना पड़ा कि-
“जिनके आंगन में अमीरी का शज़र लगता है।
उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है।।”
सीधा-साधा मतलब यही कि आम आदमी के ख़ास काम की कोई क़ीमत नहीं। बेहूदगी को हुनर साबित करने का पेटेंट मालदारों और रसूखदारों के पास है। सीधा-सपाट अर्थ यह है कि मैंगो मेन यानि आम आदमी की न कोई क़द्र, है, न कोई सुनवाई। ऐसे में सवाल वही कि किया जाए तो आख़िर क्या किया जाए?
बन्दे ने बड़ी माथापच्ची करते हुए आख़िरखार इस सवाल का जवाब तलाश ही लिया। वो भी बिना टाइम खोटा किए, बिना एक धेला लगाए। वही परम-ज्ञान आज आप लोगों के लिए फ़ोकट में मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है। आप चाहें तो नुस्ख़ा अपनाएं और लाभ उठाएं।
अगर आपको लगता है कि आप महज एक छुटभैया टाइप के कार्यकर्ता हैं और चुनावी साल की किसी सभा या भीड़ में अपनी बात दमख़म से रखने की भूमिका को निभाने में सक्षम नहीं हैं तो गिरगिट बाबू, झाड़ू दास या भाडू भाऊ के रास्ते पर चलिए और अचानक छा जाइए। इसके बाद पार्टी या नेता आपको ढूंढे न ढूंढें, मीडिया वाले आपका पीछा नहीं छोड़ेंगे। बस आप में एक बार मंच पर चढ़ कर माइक पकड़ने भर का माद्दा हो और बेलौस बक़-बक़ की थोड़ी सी समझ। बस समझो, बन गया काम। अब करना क्या है, यह और जान लो एक बार अच्छे से।
★ सभा की कोई कार्यवाही शुरू होने से पहले ही चींचाना शुरु कर दीजिए। चींचाना बोले तो हुल्लड़ मचाना। खेल बिगाड़ने वाले अंदाज़ में। बड़े नेताओं के मंच पर आने से पहले। माइक टेस्टिंग या भीड़ जुटाने के बहाने।
★ इसके बाद सभापति या संचालक के आग्रह व आदेश की जम कर धज्जियां उड़ाना जारी रखिए। माइक पकड़ते ही समझ जाइए कि मानव-तन आसानी से मिल सकता है मगर माइक और मौक़ा नहीं।
★ सांकेतिक घुड़की या पायजामा-खिंचाई तक अंड-बंड बोलते, रहिए और अनर्गल प्रलाप के हश्र को भूल जाइए। याद रखिए कि नंगा हर हाल में परमेश्वर से बड़ा होता है।
★ निलंबन, निष्कासन के अंदेशे को बला-ए-ताक रखते हुए अंगद का पाँव बने रहिए। मतलब अड़ियल टेसू की तरह से अड़े रहिए। भूल जाइए कि आपके बाद किसकी बारी है कोहराम मचाने की।
★ ख़ुद कैमरों की रेंज से बाहर जाने के बजाय मार्शल या बाउंसर-टाइप दबंग कार्यकर्ताओं को आने दीजिए। जो आपको टंगा-टोली कर के ले जाएं। इसके बाद आपकी एक्सक्लूसिव तस्वीर आपको लाइम-लाइट में लाने का काम खुद कर देगी। साथ ही वायरल वीडियो भी।
★ इस झूमा-झटकी के बीच पूरी फ़ज़ीहत के साथ बाहर जाइए और फिर एक पीड़ित के रूप मे हमदर्दी हासिल करते हुए अपने जैसों की नई महफ़िल सजाइए। जो आपको ख़ुद अपना लीडर मान लेंगे। इतना सब देखने के बाद। आप पाएंगे कि आप दबे-कुचले से दबंग बन चुके हैं। महज चंद मिनटों में।
★ आपको किसी मोर्चे पर माथाफोड़ी से निजात मिलने के बाद हो सकता है कि अगली पार्टी के किसी दिग्गज का बुलावा आया जाए। आता है तो उसे लपकने का मौका भूल कर भी न गंवाएं।
★ आपकी तस्वीर एक बार टींव्ही और अखबारों की सुर्खी बनी और आप देखते ही देखते टमाटर से सुर्ख हुए। याद रहे कि बुझे हुए चेहरे पर नमक की परत चढ़ाने का काम “नमक-दलाली” के बस का नहीं। यह खेल केवल “नमक-हरामी” से ही मुमकिन है।
★ ऐसा कुछ न होने की सूरत में सदन या पार्टी दफ़्तर के बाहर धरना देने या हड़कम्प मचाने के बाद भी पूरी मीडिया का फ़ोकस आप पर रहेगा। न भूलें कि सियासी समर में “मेघनाद” या “कुंभकर्ण” से भीषण वेल्यू “विभीषण” की होती है। मिसाल आपको याद होगी ही?
★ जितना संभव हो, पार्टी की लीक से उल्टा चलने की कोशिश मन-वचन-कर्म से जारी रखें। इससे आप एक अलग पहचान बनाने में सफल होंगे। रहा सवाल आपके बोल-वचन से पार्टी की किरकिरी का, तो उसकी चिंता करने का काम पार्टी प्रवक्ताओं पर छोड़ें, जो इसी के लिए पैदा हुए हैं। अपने रुख पर तब तक अडिग रहें, जब तक बड़ी शामत न आ जाए। इसके बाद अगली गुस्ताख़ी का लाइसेंस एक माफ़ी से नया हो ही जाएगा।
★ उक्त टास्क को पूरा करते ही आप क्षेत्र से जिला, ज़िले से संभाग, संभाग से राज्य व राज्य स्तरीय से राष्ट्रीय नेता बनते हुए विश्वस्तरीय राजनेता बन जाएंगे। फिर भाड़ में जाए दल और भट्टी में जाए ससुरा “गॉड-फादर।”
एक ख़ास बात और…। सारे नुस्खे शर्तिया कारगर हैं। बशर्ते आप किसी विशेष जाति, वर्ग या समुदाय से हों। आप पर छह-आठ झूठे-सच्चे पुलिस केस हों तो कहने ही क्या? न हों तो भी निराश न हों। अभी भी वक़्त है। कर डालिए चलते-फिरते आपदा मोल लेने का सिलसिला। बन जाएगा काम। हो सके तो एकाध छूट-पुट हमला ख़ुद ही करवा डालिए, किसी चंगू-मंगू से। दो-पांच सौ देकर, हल्का-फुल्का सा। एकाध धमकी भरा लेटर या मैटर पोस्ट कर लीजिए अपने आपको। उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर डालिए। आप हाथों-हाथ “चवन्नी-छाप” से “अठन्नी-छाप” हो जाएंगे।
कुल मिला कर बिना काम, बिना दाम पूरा-पूरा नाम होना पक्का। साथ ही फुल ऐशो-आराम तय। फ्री का तंबू, फ्री का डेरा। साथ में शानदार गाड़ी और सुरक्षा का घेरा। तो हो जाइए तैयार, दिखाने को अपना जलवा और जलाल। मत भूलिए कि मुश्किल से आता है चुनावी साल। जय रियासत, जय सियासत।।

●संपादक/न्यूज़&व्यूज़●
श्योपुर (मध्यप्रदेश)

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