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29 Jul 2022 · 1 min read

💐💐धर्मो रक्षति रक्षित:💐💐

जनाः इत्थं शंका कुर्वन्ति यत् यः पापं कुर्वन्ति ते तु सुखं प्राप्नुवन्ति परं ये धर्मे चलन्ति ते दुःख प्राप्नुवन्ति।इत्थं शंका द्रौपदीं अपि अभवत्।युधिष्ठिर: द्रौपदीं वदति स्म यत् धर्मस्य पालनं तु मनुष्यमात्रस्य कर्तव्यं च मानवता च।यः सुखस्य कृते धर्मस्य पालनं कुर्वन्ति ते धर्मस्य तत्वं जानाति।पूर्वकर्मानुसारः सर्वे दुःख: च सुख: प्राप्नुवन्ति।यः धर्मस्य रक्षा करोति च धर्म एतस्य रक्षा करोति।-“धर्मो रक्षति रक्षित:” अर्थात् वस्तु परिस्थिति: च आदयो: सुख: न प्रत्युत् एतस्य सदुपयोगे सुख।

©®अभिषेक:पाराशर

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