Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Jan 2024 · 1 min read

🌸 मन संभल जाएगा 🌸

🌸 मन संभल जाएगा 🌸

जब कभी मन हारने लगे विश्वास टूटने लगे
खुद को उम्मीद की चुनर से ढ़ंक तुम
मन संभल जाएगा बुरा वक्त गुजर जाएगा ! बुरा वक्त गुजर जाएगा ।
इंतजार के गहनों का श्रृंगार कर खुद को निखार लो
धैर्य का पाठ कर खुद को नई पहचान दो ।

मन संभल जाएगा बुरा वक्त गुजर जाएगा
दिन के बाद रात गम के बद खुशी यही रीत है बनाई प्रकृति ने
उपर बैठा ईश्वर कर रहा है न्याय सभी का बुरे वक्त मे जो साथ ना देगा तन्हा एक दिन
वो भी रहेगा ।

मुश्किल वक्त है गुजरेगा दौर फिर से सुनहरा हागा सामने अपने और परायों का चेहरा होगा ।

82 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
दीप की अभिलाषा।
दीप की अभिलाषा।
Kuldeep mishra (KD)
*दुनिया से जब जाऊँ तो क्या, छोड़ूँ क्या ले जाऊँ( हिंदी गजल/गी
*दुनिया से जब जाऊँ तो क्या, छोड़ूँ क्या ले जाऊँ( हिंदी गजल/गी
Ravi Prakash
दोस्ती देने लगे जब भी फ़रेब..
दोस्ती देने लगे जब भी फ़रेब..
अश्क चिरैयाकोटी
★क़त्ल ★
★क़त्ल ★
★ IPS KAMAL THAKUR ★
सत्यमेव जयते
सत्यमेव जयते
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
वह सिर्फ पिता होता है
वह सिर्फ पिता होता है
Dinesh Gupta
तुमको ख़त में क्या लिखूं..?
तुमको ख़त में क्या लिखूं..?
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
पावस
पावस
लक्ष्मी सिंह
फूल कभी भी बेजुबाॅ॑ नहीं होते
फूल कभी भी बेजुबाॅ॑ नहीं होते
VINOD CHAUHAN
पल भर में बदल जाए
पल भर में बदल जाए
Dr fauzia Naseem shad
कहानी संग्रह-अनकही
कहानी संग्रह-अनकही
राकेश चौरसिया
सभी मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
सभी मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
surenderpal vaidya
"तकलीफ़"
Dr. Kishan tandon kranti
प्रेम की चाहा
प्रेम की चाहा
RAKESH RAKESH
पसंद तो आ गई तस्वीर, यह आपकी हमको
पसंद तो आ गई तस्वीर, यह आपकी हमको
gurudeenverma198
जब मुझसे मिलने आना तुम
जब मुझसे मिलने आना तुम
Shweta Soni
आजमाइश
आजमाइश
AJAY AMITABH SUMAN
विकलांगता : नहीं एक अभिशाप
विकलांगता : नहीं एक अभिशाप
Dr. Upasana Pandey
सम्पूर्ण सनातन
सम्पूर्ण सनातन
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
परिवार
परिवार
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
" मैं फिर उन गलियों से गुजरने चली हूँ "
Aarti sirsat
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
*** तुम से घर गुलज़ार हुआ ***
*** तुम से घर गुलज़ार हुआ ***
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
ऐसा बदला है मुकद्दर ए कर्बला की ज़मी तेरा
ऐसा बदला है मुकद्दर ए कर्बला की ज़मी तेरा
shabina. Naaz
नववर्ष-अभिनंदन
नववर्ष-अभिनंदन
Kanchan Khanna
नौकरी
नौकरी
Aman Sinha
दया करो भगवान
दया करो भगवान
Buddha Prakash
I want to find you in my depth,
I want to find you in my depth,
Sakshi Tripathi
नेता या अभिनेता
नेता या अभिनेता
Shekhar Chandra Mitra
कृतज्ञता
कृतज्ञता
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Loading...