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8 Dec 2022 · 1 min read

■ हिंदी ग़ज़ल / वर्तमान

■ हिंदी ग़ज़ल / वर्तमान
【प्रणय प्रभात】

★ मुँह खोल रहा है वर्तमान,
कुछ बोल रहा है वर्तमान।।

★ कितना खोया कितना पाया।
यह तोल रहा है वर्तमान।।

★ सुंदर अतीत की गलियों में।
फिर डोल रहा है वर्तमान।।

★ भावी को रेंगने नए रंग।
कुछ घोल रहा है वर्तमान।।

★ अनमोल रहा जिनका अतीत।
अनमोल रहा है वर्तमान।।

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