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4 Dec 2022 · 1 min read

■ बदलती कहावत…..

#एक_और_प्रयोग:-
【प्रणय प्रभात】
■ पुरखे कहते आए-
“घर का जोगी जोगड़ा,
आन गांव का सिद्ध।”
■ मैंने भी जोड़ दिया-
“उन्हें गरुड़ क्या भाएगा?
जिन्हें भा रहा गिद्ध।।”
बन गया ना दोहा…??
अभिप्राय-
“घटिया लोग घटिया पसंद।”
या फिर
“मलयागिरि के भील न जानें चंदन वाला मोल।”
क्यों करना परवाह…?

Language: Hindi
1 Like · 116 Views
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