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30 Jan 2024 · 1 min read

ਯਾਦਾਂ ਤੇ ਧੁਖਦੀਆਂ ਨੇ

ਯਾਦਾਂ ਤੇ ਧੁਖਦੀਆਂ ਰਹਿੰਦੀਆਂ ਨੇ ਉਮਰ ਭਰ।
ਕਿਵੇਂ ਆਖਾਂ ਰੱਬ ਨੂੰ ,ਇੰਝ ਨਹੀਂ ਇੰਝ ਕਰ।

ਐਵੇਂ ਅਵੇਸਲੇ ਬੈਠ ,ਕਿਤੇ ਅੱਖੀਆਂ ਨਾ ਭਰ।
ਦੇ ਉਹਦਾ ਸਰ ਗਿਆ ਏ ,ਤੇਰਾ ਵੀ ਜਾਊ ਸਰ।

ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਬਹੁਤ ਸਕੂਨ ਨਾਲ ਰਹੀ ਏ ਗੁਜ਼ਰ।
ਪੱਤੇ ਨਹੀ ਆਉਣੇ, ਸੁਕ ਗਿਆ ਏ ਸ਼ਜਰ।

ਬਹੁਤ ਭੀੜ ਹੈ ਏਸ ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ
ਫੇਰ ਵੀ ਕਿਉਂ ਤਨਹਾ ਏ ਹਰ ਬਸ਼ਰ।

ਪੂਰੀ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਦੁੱਖ , ਮਿਟਾਵੇ ਤੂੰ ਰੱਬਾ
ਇਲਤਜਾ ਏ ਮੇਰੀ ,ਮੇਰੀ ਵੀ ਜ਼ਰਾ ਫ਼ਿਕਰ ਕਰ।

ਸੁਰਿੰਦਰ

Language: Punjabi
56 Views
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