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15 Dec 2022 · 1 min read

ਚੇਤੇ ਆਉਂਦੇ ਲੋਕ

ਚੇਤੇ ਆਉਂਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਚੇਤਾ ਕਿਵੇ ਭੁਲਾਈਦਾ
ਰਾਹ ਸੱਜਣਾ ਦੇ ਉੱਤੇ ਕਿਵੇਂ ਦੀਵਾ ਬਣ ਜਾਂਈਦਾ।

ਸਾਗਰਾਂ ਕੰਢਿਓ ਕੌਣ ਚੁੱਕ ਲੈ ਗਿਆ ਮੋਤੀ ਵੇ
ਇਹਨਾਂ ਗੱਲਾਂ ਨੂੰ ਬਹੁਤਾ ਦਿਲ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਲਾਈਦਾ।

ਖੰਭ ਕੁਤਰ ਕੇ ਮੇਰੇ ਆਖੇ ਕਿੰਨੀ ਸੋਹਣੀ ਤੂੰ ਲੱਗੇ
ਕਰ ਜੁਲਮ ਉਹ ਇੰਝ ਦਿਲ ਨਹੀਂ ਭਰਮਾਈਦਾ।

ਰੱਖ ਇਕੋ ਤੇ ਟੇਕ ਤੇ ਇਕੋ ਤੇ ਰੱਖ ਤੂੰ ਆਸ
ਹਰ ਆਉਂਦੇ ਜਾਂਦੇ ਨੂੰ ਰੱਬ ਨਹੀ ਬਣਾਈਦਾ।
ਸੁਰਿੰਦਰ ਕੌਰ

Language: Punjabi
228 Views
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