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18 Nov 2023 · 1 min read

আমায় নূপুর করে পরাও কন্যা দুই চরণে তোমার

আমায় নূপুর করে পরাও কন্যা দুই চরণে তোমার
এটুকু আশা পূরণ করো সার্থক হবে জীবন আমার।

থাকতে চাই তোমার চরণে সদা
খুলোনা আমায় কখনও যেন-
ওগো জাগবে যে, আমার হৃদয়ে ব্যথা।
তোমার ও দুই কোমল চরণ স্বর্গ সম অপরূপ
কন্যা রাখো না আমায় যতন করে অনুরোধ এতটুক।

তোমার চলনে মাতাব চারপাশ ‘ঝুমুর ঝুম’ ধ্বনি তুলে
তখন মুগ্ধ হয়ে ও দুই চরণ দেখবে লোকে।
কন্যা এতেই আমার শান্তি, শান্তি আমার এতেই।

— অর্ঘ্যদীপ চক্রবর্তী
১৬ই মে,২০২৩,বিকাল

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