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25 Jun 2023 · 1 min read

আজ রাতে তোমায় শেষ চিঠি লিখবো,

আজ রাতে তোমায় শেষ চিঠি লিখবো,
কে জানে প্রদীপ ভোর অব্দি জ্বলবে কিনা?
বোমা আর গোলাবারুদের এই যুগে
জানিনা, এমন নির্মল বাতাস আর বইবে কিনা?

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