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11 Feb 2024 · 1 min read

हैवानियत के पाँव नहीं होते!

सच है कि हैवानियत के पाँव नहीं होते!
अजीब सा मंज़र है –
हर ओर चीख़ें हैं – दर्द है

बस आँसुओं की सूखी लकीर है !
बेबस आँखें –
लुटी – कटी – फटी लाशों में
उनको ढूँढती हैं –

जो बस लम्हा पहले हमदम थे !
दरिंदगी के बादल – बस लहू ही बरसाते हैं
सच है –
दहशतगर्दी के कहीं ठाँव नही होते!!

Language: Hindi
68 Views
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