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Jan 22, 2017 · 1 min read

हुस्न

अपने हुस्न का नशा कुछ इस तरह चढ़ा उनपर ।
रोज़ आईने में चाँद को निहारने लगे।
ना पता था उन्हें कि चाँद ही था नसीब में
तभी वो हमारे सपने सजाने लगे

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