Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
22 Jul 2016 · 1 min read

हाइकू

1
घास रोदन
अंकुरण दुबारा
है जिजीविषा ।
2
ताकते मोर
आच्छादित गगन
कब वर्षा हो।
3
बनाता घर
मिट्टी द्वारा अबोध
एक सृजन।
4
उन्हें ताकता
ठेला खींचता बच्चा
जो हैं कारों मैं ।
5
ये फुटपाथ
मेरा आश्रय स्थल
कहे अनाथ।
6
एक टांग से
बगुले की प्रतीक्षा
तप ही तो है।
7
उठता धुआँ
उजड़े घर कहें
आतंक कथा।
8
माता-पिता का
मात्र छणिक स्वार्थ
जन्मता बच्चे।
9
शक्ल का तेरी
सच्चा हूँ प्रतिबिम्ब
कहे दर्पण।
11
कहें कहानी
उजड़े आशियां की
ये खण्डहर।
11
झूठे दोनों की
प्रतीक्षा में ताकते
भिखारी बच्चे।
12
नव-पल्लव
पूछे जन्म का राज
एक जिज्ञासा।
13
हो आशियाना
कारीगर का कभी
रहा सपना |
14
स्वदेश में भी
बन कर विदेशी
हम रहते।
15
कसने से ही
देता है स्वर मीठे
वीणा का तार।
16
पर-सुख से
दु:खी आज मानव
न स्व दु:ख से।
17
किससे कहूँ
दर्द मेहनत का
मज़दूर हूँ।
18
पानी पर ही
बरसे खूब पानी
देख नादानी ?
19
पेट हेतु भी
होना पड़ा पेट से
धिक् रे जीवन !
20
लेखन देख
कांपता पेड़, सोचे
अब कटूंगा ।
21
दे कर दर्द
बांटते मरहम
छद्म मसीहा |
22
मत उलीचो
बाल्टियों से अंधेरा
दीप जलाओ ।
23
मेरी है मेरी
लड़े बचपन में
अब, माँ तेरी ।
24
कर देख लो
गुड़ चींटी का मेल
आज की दोस्ती |
25
नभ को ताक
अकाल में बरसा
मन मेघ सा ।
26
खींच लकीरें
धरा पर स्वार्थ की
बनाते देश ।
27
बरसे मेघ
जो घन-घना कर
मचला मन।
28
जो तू चाहता
आवागमन मुक्ति
निज को जान ।
29
उड़ गगन
जब जितना चाहे
ना भूल जमीं ।
30
रह के साथ
जगत भीड़ में भी
हम अकेले ।

Language: Hindi
259 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
छोड़ऽ बिहार में शिक्षक बने के सपना।
छोड़ऽ बिहार में शिक्षक बने के सपना।
जय लगन कुमार हैप्पी
खुशियाँ
खुशियाँ
Dr Shelly Jaggi
** मुक्तक **
** मुक्तक **
surenderpal vaidya
* यौवन पचास का, दिल पंद्रेह का *
* यौवन पचास का, दिल पंद्रेह का *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
"रंग भले ही स्याह हो" मेरी पंक्तियों का - अपने रंग तो तुम घोलते हो जब पढ़ते हो
Atul "Krishn"
मोहब्बत के लिए गुलकारियां दोनों तरफ से है। झगड़ने को मगर तैयारियां दोनों तरफ से। ❤️ नुमाइश के लिए अब गुफ्तगू होती है मिलने पर। मगर अंदर से तो बेजारियां दोनो तरफ से हैं। ❤️
मोहब्बत के लिए गुलकारियां दोनों तरफ से है। झगड़ने को मगर तैयारियां दोनों तरफ से। ❤️ नुमाइश के लिए अब गुफ्तगू होती है मिलने पर। मगर अंदर से तो बेजारियां दोनो तरफ से हैं। ❤️
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
"शतरंज के मोहरे"
Dr. Kishan tandon kranti
विश्व सिंधु की अविरल लहरों पर
विश्व सिंधु की अविरल लहरों पर
Neelam Sharma
अनुसंधान
अनुसंधान
AJAY AMITABH SUMAN
*आते हैं भगवान 【भक्ति गीत】*
*आते हैं भगवान 【भक्ति गीत】*
Ravi Prakash
विनम्रता, सादगी और सरलता उनके व्यक्तित्व के आकर्षण थे। किसान
विनम्रता, सादगी और सरलता उनके व्यक्तित्व के आकर्षण थे। किसान
Shravan singh
Tufan ki  pahle ki khamoshi ka andesha mujhe hone hi laga th
Tufan ki pahle ki khamoshi ka andesha mujhe hone hi laga th
Sakshi Tripathi
3013.*पूर्णिका*
3013.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
पुस्तक
पुस्तक
Sangeeta Beniwal
बीज
बीज
Dr.Priya Soni Khare
सत्य और सत्ता
सत्य और सत्ता
विजय कुमार अग्रवाल
~~~~~~~~~~~~~~
~~~~~~~~~~~~~~
Hanuman Ramawat
मत सता गरीब को वो गरीबी पर रो देगा।
मत सता गरीब को वो गरीबी पर रो देगा।
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
💐अज्ञात के प्रति-71💐
💐अज्ञात के प्रति-71💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
*माँ सरस्वती जी*
*माँ सरस्वती जी*
Rituraj shivem verma
तुमसे बेहद प्यार करता हूँ
तुमसे बेहद प्यार करता हूँ
हिमांशु Kulshrestha
देश के वीरों की जब बात चली..
देश के वीरों की जब बात चली..
Harminder Kaur
अ'ज़ीम शायर उबैदुल्ला अलीम
अ'ज़ीम शायर उबैदुल्ला अलीम
Shyam Sundar Subramanian
सैनिक
सैनिक
Mamta Rani
If you migrate to search JOBS
If you migrate to search JOBS
Ankita Patel
हर पाँच बरस के बाद
हर पाँच बरस के बाद
Johnny Ahmed 'क़ैस'
कुछ व्यंग्य पर बिल्कुल सच
कुछ व्यंग्य पर बिल्कुल सच
Ram Krishan Rastogi
बचपन के दिन
बचपन के दिन
Surinder blackpen
डॉ. नामवर सिंह की आलोचना के प्रपंच
डॉ. नामवर सिंह की आलोचना के प्रपंच
कवि रमेशराज
जीवन का हर वो पहलु सरल है
जीवन का हर वो पहलु सरल है
'अशांत' शेखर
Loading...