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30 Jun 2018 · 1 min read

हाइकु

” कृषक ”
*******

(1)गर्म तपन
उगलता सूरज
कृषि सुखाई।

(2)बिन पानी के
आग लगी खेतों में
कृषक रोए।

(3)कृषक छाले
सुलग राख हुए
कोई न देखे।

(4)अन्नदाता ने
सब जन हिताय
आत्महत्या की।

(5)कैसे रोपेगा
बंजर भूमि धान
मूक किसान।

डॉ. रजनी अग्रवाल”वाग्देवी रत्ना”
वाराणसी(उ.प्र.)
संपादिका-साहित्य धरोहर।

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